30 मिनट में पोस्टमार्टम, चीरफाड़ की जरूरत नहीं, एम्स में शुरू होगी वर्चुअल ऑटोप्सी प्रक्रिया

Virtual Autopsy: एम्स नागपुर में जल्द वर्चुअल ऑटोप्सी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिससे बिना चीरफाड़ केवल 30 मिनट में पोस्टमार्टम संभव होगा और कानूनी साक्ष्य अधिक सटीक बनेंगे।
AIIMS Nagpur
Virtual Autopsy:एम्स नागपुर (सोर्सः सोशल मीडिया)
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AIIMS Nagpur: पोस्टमार्टम को लेकर आज भी कई बार परिजन सहमति नहीं देते। इसके पीछे धार्मिक, भावनात्मक और सामाजिक कारण होते हैं, लेकिन संदिग्ध मौत या पुलिस मामलों में पोस्टमार्टम अनिवार्य होता है। मेडिकल साइंस में हुई प्रगति के चलते अब पोस्टमार्टम भी बिना चीरफाड़ संभव होने जा रहा है। एम्स नागपुर में आधुनिक तकनीक की मदद से पोस्टमार्टम प्रक्रिया को और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

भविष्य में वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से पोस्टमार्टम किया जा सकेगा, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि कानूनी साक्ष्य भी अधिक मजबूत होंगे। केंद्र सरकार देश के विभिन्न अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एम्स) में प्रायोगिक तौर पर वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। यह एक आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक है, जिसमें सीटी स्कैन और एमआरआई के संयोजन का उपयोग किया जाता है।

वित्त मंत्रालय से बजट स्वीकृति का इंतजार

इस तकनीक से शरीर के बाहरी हिस्सों के साथ-साथ अंदरूनी चोटों, घावों, हड्डियों के फ्रैक्चर और रक्त के थक्कों की भी सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। मशीन की सहायता से महज 30 मिनट के भीतर पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। केंद्र सरकार देश के विभिन्न एम्स में इस प्रक्रिया को शुरू करने की योजना पर काम कर रही है, जिसके लिए वित्त मंत्रालय से बजट स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।

शव के हर हिस्से की तैयार होगी इमेज

इस तकनीक में शव को एक विशेष सीटी स्कैनर में रखा जाता है, जहां शरीर के हर हिस्से की कई परतों में स्कैनिंग की जाती है। इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से पूरे शरीर की थ्री-डी इमेज तैयार की जाती है। डॉक्टर इन इमेज के माध्यम से शरीर के विभिन्न हिस्सों की बारीकी से जांच कर सकते हैं, जिसमें शव को चीरने की आवश्यकता नहीं पड़ती। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से न्यायिक प्रक्रिया में भी यह तकनीक बेहद सहायक साबित होगी।

वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से पोस्टमार्टम संभव

एम्स नागपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. प्रशांत जोशी ने कहा कि “प्रायोगिक तौर पर इस तकनीक को देश के विभिन्न एम्स में अपनाया जा रहा है। एम्स नागपुर प्रशासन स्तर पर भी इस विषय पर चर्चा हुई है। भविष्य में यहां भी वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से पोस्टमार्टम संभव होगा। इससे समय की बचत होगी, सटीकता बढ़ेगी और शव की चीरफाड़ न होने से परिजनों को भी मानसिक राहत मिलेगी।”

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