नागपुर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का 'फ्लॉप शो', 2500 नक्शे मंजूर, पर जमीन पर सिर्फ 214 में ही हार्वेस्टिंग!

Nagpur Rain Water Harvesting: नागपुर मनपा के नगर रचना विभाग की बड़ी लापरवाही। 2500 मंजूर मकानों में से केवल 214 में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग। गिरते भू-जल स्तर के बीच महापौर की योजनाएं खतरे में।
Gross negligence on the part of the Nagpur Municipal Corporation's Town Planning Department. Out of 2,500 approved houses, only 214 have rainwater harvesting.
वॉटर हार्वेस्टिंग (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Municipal Corporation Town Planning Department: नागपुर सिटी में भू-जल के गिरते स्तर और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को पुख्ता करने की दिशा में पदभार ग्रहण करते ही महापौर नीता ठाकरे ने गंभीरता से लिया है। ठाकरे शहर में जल स्तर बढ़ाने को लेकर काफी गंभीर नजर आ रही हैं, लेकिन अधिकारी उनकी प्लानिंग को फेल करने में लगे हुए हैं।

इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 2 से ढाई वर्षों में महानगर पालिका के नगर रचना विभाग की ओर से लगभग 2,500 मकानों के नक्शों को मंजूरी प्रदान की गई। नियमों के अनुसार रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के प्रावधानों के बिना नक्शा मंजूर नहीं होता है। नक्शा मंजूर करते समय रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रावधान तो किया गया, लेकिन वास्तव में इसे अमल में कहीं नहीं लाया जा रहा है।

यही कारण है कि 2,500 मंजूर नक्शों की तुलना में अब तक केवल 214 प्रोजेक्ट में ही रेन वॉटर हार्वेस्टिंग हो पाया है जिसे नगर रचना विभाग की ओर से ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया। अधिकारी चैन की नींद में हैं, जबकि बिल्डर बिंदास नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

नकेल कसते ही रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रमाण बढ़ा

सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पहले पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने फ्लैट स्कीम या अन्य इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग होने तथा इमारतों के मालिकों के पास ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र होने के बाद ही रजिस्ट्री करने की सूचनाएं जारी की थीं। इसके बाद से फ्लैट स्कीम में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का प्रमाण तो बढ़ा किंतु निजी इमारतों में यह प्रमाण नगण्य है। सूत्रों के अनुसार, अब सिटी में मंजूर किए गए नक्शों के अनुसार इन इमारतों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सुनिश्चित करने की चुनौती महापौर नीता ठाकरे के समक्ष है।

प्रशासन का अजीबोगरीब तर्क

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को लेकर मनपा के नगर रचना विभाग का अजीबोगरीब तर्क है। मुख्यालय में अधिकारियों का मानना है कि बिल्डिंग प्लान की मंजूरी तो मुख्यालय से ऑनलाइन मिलती है किंतु नक्शा मंजूरी के बाद संबंधित इमारतों के निर्माण से लेकर इसमें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग हुई या नहीं, इसका लेखा-जोखा रखने की जिम्मेदारी जोनल कार्यालय की है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि यदि मुख्यालय से मंजूरी दी जाती है, तो यह जिम्मेदारी भी मुख्यालय पर लादी जानी चाहिए अन्यथा नक्शा मंजूरी के अधिकार भी जोनल कार्यालय में दिए जाने चाहिए ताकि इमारत निर्माण से लेकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग तक की देखरेख जोनल कार्यालय द्वारा की जा सके।

चार वर्षों में तेजी से बढ़ा ग्राफ

शहर में बुनियादी ढांचे के विकास और शहरीकरण की रफ्तार में पिछले 4 वर्षों में जबरदस्त तेजी देखी गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 की तुलना में वर्ष 2024-25 तक भवन निर्माण अनुमति के लिए आने वाले आवेदनों की संख्या में लगभग 250% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 के बीच कुल 380 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 222 को मंजूरी मिली थी। अगले ही वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह संख्या अचानक बढ़कर 1226 तक पहुंच गई, जो विकास की एक बड़ी छलांग को दर्शाती है। इस दौरान 886 आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की गई।

लगातार बढ़त पर आंकड़े

यह बढ़त का सिलसिला आगामी वर्षों में भी जारी रहा। वर्ष 2023-24 में कुल आवेदनों की संख्या 1339 रही, जिसमें से 949 को स्वीकृत किया गया। वर्तमान डेटा के अनुसार, वर्ष 2024-25 (31 मार्च 2025 तक) में कुल 1,342 आवेदन दर्ज किए गए, जिनमें से 914 स्वीकृत किए जा चुके हैं और 93 अभी प्रक्रियाधीन (इन प्रोग्रेस) हैं।

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से ललेंद्र करवाड़े की रिपोर्ट
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