थर्मल पावर प्लांट की चुनौतियों की समीक्षा, श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने दिए सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश

Akash Fundkar Visits: श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने चेंबूर स्थित टाटा पावर थर्मल प्लांट का दौरा कर औद्योगिक सुरक्षा, तकनीकी संचालन, साइबर सुरक्षा और भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों की समीक्षा की।
Akash Fundkar Visits TATA Power Thermal Plant Chembur
श्रम मंत्री फुंडकर टाटा पावर थर्मल प्लांट का दौरा के द्वौरान (फोटो नवभारत)
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Akash Fundkar Visits TATA Power Thermal Plant: महाराष्ट्र के श्रम मंत्री एड. आकाश फुंडकर ने मुंबई के चेंबूर स्थित टाटा पावर थर्मल पावर कंपनी के जनरेशन स्टेशन का दौरा किया. उन्होंने प्लांट में बॉयलर के उपयोग, औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी संचालन का निरीक्षण किया. इस दौरान वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

तकनीकी और साइबर सुरक्षा पर चर्चा

टाटा पावर के ट्रॉम्बे प्रमुख आशीष भट ने हाल ही में प्लांट के संचालन, तकनीकी चुनौतियों और वहाँ अपनाए गए आधुनिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान माननीय मंत्री जी ने प्लांट की यूनिट क्षमता और विभिन्न उपकरणों की कार्यक्षमता की बारीकी से समीक्षा की।

चर्चा के दौरान मुख्य रूप से दो बड़ी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें पहला समुद्री खारे पानी के उपयोग से उत्पन्न होने वाली तकनीकी जटिलताएँ थीं और दूसरा डिजिटल युग में संभावित साइबर हमलों का खतरा।

मंत्री एड. आकाश फुंडकर जी ने इन दोनों ही क्षेत्रों में प्लांट द्वारा सुरक्षा और परिचालन को बनाए रखने के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस पूरी समीक्षा का मुख्य उद्देश्य प्लांट की कार्यप्रणाली को और अधिक आधुनिक, सुरक्षित तथा कुशल बनाना है ताकि भविष्य में किसी भी तकनीकी या साइबर संकट से मजबूती से निपटा जा सके।

भविष्य की चुनौतियों पर मंथन

इस दौरे के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में आ रहे आधुनिक बदलावों और थर्मल पावर प्लांट पर उनके प्रभावों को लेकर गहन मंथन किया गया। चर्चा में मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से होते विस्तार और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के बढ़ते उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो पारंपरिक पावर प्लांट्स के भविष्य के संचालन को प्रभावित कर रहे हैं।

इन उभरती चुनौतियों के बीच, मंत्री फुंडकर ने औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिकों के हितों को सबसे ऊपर रखने की बात कही। उन्होंने प्लांट प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत तथा सख्त बनाया जाए, ताकि श्रमिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके और किसी भी प्रकार की औद्योगिक दुर्घटना से बचा जा सके।

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