वो शरणार्थी नहीं, धर्म के योद्धा थे! भारत-पाक विभाजन पर बोले RSS चीफ मोहन भागवत, सिंधी समाज को लेकर कही ये बात

RSS Chief Mohan Bhagwat Statement: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 1947 में पाकिस्तान से भारत आए लोग शरणार्थी नहीं, बल्कि मातृभूमि और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सच्चे योद्धा थे।
RSS chief Mohan Bhagwat statement on Partition Sindhi community are not refugees but warriors
RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mohan Bhagwat On Sindhi Community: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विभाजन के दर्द और विस्थापितों के संघर्ष को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 1947 में देश के बंटवारे के समय जो लोग पाकिस्तान से सब कुछ छोड़कर भारत आए, उन्हें शरणार्थी कहना बिल्कुल गलत होगा। वे शरणार्थी नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति अगाध प्रेम के कारण भारी कष्ट सहने वाले संघर्ष के योद्धा थे।

मोहन भागवत गुरुवार को नागपुर में सिंधी समुदाय द्वारा संचालित सिंधु एजुकेशन सोसायटी के 75वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सिंधी समाज और अन्य विस्थापितों के साहस को नमन किया।

बंटवारे के समय जो लोग भारत आए वे संघर्ष के योद्धा: भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 1947 में बंटवारे के समय जो लोग पाकिस्तान से भारत आए, वे शरणार्थी नहीं थे, बल्कि वे संघर्ष के योद्धा थे। उन लोगों ने मातृभूमि और धर्म के प्रति अपने प्रेम और लगाव के कारण भारी कष्ट और पीड़ा सही। उन्होंने कहा कि मातृभूमि से प्रेम के कारण इन लोगों ने पाकिस्तान में अपनी पुरखों की मेहनत से अर्जित संपत्ति, जमीन और कारोबार छोड़कर भारत में आने का निर्णय लिया।

RSS प्रमुख ने बताया लोग भातर क्यों आए

मोहन भागवत ने कहा कि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय किसी मजबूरी के चलते नहीं, बल्कि लोगों ने सोच-समझकर सीमा पार से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वो पाकिस्तान में नहीं, बल्कि भारत में रहना चाहते थे, जहां वो पूरी आजादी के साथ अपने धर्म का पालन कर सकें। वो लोग शरणार्थी नहीं, बल्कि विस्थापित थे। उनको शरणार्थी कहना गलत होगा, क्योंकि वे मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति लगाव और निष्ठा के कारण संघर्ष करने वाले योद्धा थे। हालांकि हम सब भारत को एक रखने की लड़ाई हार गए थे, लेकिन उन्होंने न तो करियर चुना और न ही संपत्ति। उन्होंने अगर किसी को चुना तो वह है अपना देश और धर्म।

विपरीत परिस्थितियों के सामने हमें घुटने नहीं टेकने चाहिए

RSS प्रमुख ने कहा कि जीवन की विपरीत परिस्थितियों के सामने हमें घुटने नहीं टेकने चाहिए, बल्कि फिर से खड़ा होने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि परिस्थितियों के सामने खुद को निर्बल और असहाय समझने वाले असफल होते हैं, जबकि कठिन समय का मुकाबला करने वाले और उससे बच निकलने वाले ही अंत में सफल होते हैं।

रोजगार और रोजी-रोटी के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन यह शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए। क्योंकि बिना शिक्षा के भी लोग बड़े होते हैं और शिक्षित लोगों को नौकरी पर रखते हैं। विवेक प्राप्त करने के लिए वास्तविक शिक्षा घर से शुरू होती है, जहां पहली शिक्षक माता है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि पूरी मानव जाति को जीवन का उद्देश्य देना है, तो वे यही कि जीना अपने लिए नहीं, जीना है अपनों के लिए, स्वयं नेकी से जीना है और सबको नेकी सिखानी है। यही अपने यहा जीवन की रीति मानी जाती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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