कोटेदारों ने की मुख्य सचिव से शिकायत, सड़े गले चावल कैसे बांटे साहब, इसे जानवर ही खा सकते हैं, गरीब लोग नहीं

Nagpur Poor Quality Ration Rice: नागपुर की कई राशन दुकानों पर खराब चावल की आपूर्ति की शिकायत सामने आई है। संगठन ने राइस मिलों पर साठगांठ का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
Fair-price shop dealers complained to the Chief Secretary: "Sir, how are we supposed to distribute rotten rice? Only animals could eat this, not poor people."
नागपुर, राशन, खराब चावल,सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
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Nagpur Poor Quality Rice: सरकार गरीबों को मुफ्त में अनाज मुहैया करा रही है। हर महीने राशन केंद्रों के माध्यम से प्राधान्य गुट एवं अंत्योदय गुट के लाभार्थियों को मुफ्त में गेहूं के साथ चावल भी दिया जा रहा है। राशन को मिलों से उठाने से पहले फूड इंस्पेक्टर द्वारा चावल और गेहूं की गुणवत्ता का निरीक्षण किया जाता है, ताकि प्रत्येक लाभार्थी को अच्छा अनाज मिल सके। लेकिन इसके बावजूद नागपुर शहर के अनेक राशन केंद्रों पर खराब चावल की आपूर्ति हो रही है।

राशन में खराब चावल की आपूर्ति का आरोप

खुद कुछ राशन दुकानदारों और संगठनों ने इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इससे गरीब लाभार्थियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने जैसे लापरवाही भी सामने आई है। ऑल महाराष्ट्र फेयर प्राइस शॉपकीपर्स फेडरेशन के प्रदेश कार्याध्यक्ष संजय पाटिल ने इस संदर्भ में राज्य के मुख्य सचिव सहित अन्न औषधि प्रशासन आयुक्त, विभागीय आयुक्त नागपुर के पास शिकायत दर्ज की है।

इसमें पाटिल ने आरोप लगाया कि राइस मिलों के साथ साठगांठ से ही यह पूरा खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि राशन दुकानों पर खराब चावल की आपूर्ति हो रही है, इसलिए संगठन ने चावल भेजने वाली राइस मिलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

अन्न सुरक्षा कानून में गुणवत्ता जांचने का नियम

दुकानदारों, संगठन द्वारा की गई शिकायत में कहा गया है कि देश में अन्न सुरक्षा कानून लागू है। इसके तहत देश की गरीब जनता को प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज मुफ्त दिया जाता है।

अन्न सुरक्षा लाभार्थियों को वितरण से पहले अनाज की गुणवत्ता जांचने का शासन का नियम है लेकिन पिछले 6 महीने से शासन के ही नियम की अनदेखी की जा रही है।

इसी का नतीजा है कि मिलों में अनाज के इंस्पेक्शन के बावजूद राशन केंद्रों पर खराब चावल की आपूर्ति हो रही है।

संगठन ने यह भी कहा कि इस तरह का खराब चावल खाने से नागरिकों का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है, इसलिए संबंधित मिलों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए।

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