
नागपुर मेडिकल कॉलेज (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nylon kite string injuries: मकर संक्रांति के अवसर पर सिटी में जमकर पतंगबाजी होती है। इस बार मकर संक्रांति बुधवार को है। हालांकि हाई कोर्ट ने नायलॉन मांजे को लेकर सख्त निर्देश दिये हैं। इसके बावजूद कई लोग नायलॉन मांजे के इस्तेमाल से बाज नहीं आते। मांजे से जख्मी होने के बाद लोग सीधे सरकारी अस्पताल ही जाते हैं। यही वजह है कि मेडिकल और मेयो ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कर ली है।
ओपीडी सहित कैजुअल्टी में डॉक्टरों को अलर्ट रहने के निर्देश दिये हैं। जख्मियों के इलाज को प्राथमिकता देने को कहा गया है। संक्रांति के दिन पतंग से जख्मियों की संख्या बढ़ जाती है। पतंग उड़ाने वाले ही नहीं, बल्कि मांजे की वजह से अन्य लोग भी घायल हो जाते हैं। यही वजह है कि मेडिकल और मेयो में पूर्व तैयारी कर ली गई है। मेयो के अधिष्ठाता डॉ. रवि चव्हाण ने बताया कि मंगलवार को दो जख्मी इलाज के लिए आये थे।
मामला गंभीर नहीं होने के कारण उन्हें ड्रेसिंग कर वापस भेज दिया गया। बुधवार को ईएनटी, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक और आई डिपार्टमेंट को अलर्ट रहने के निर्देश दिये गये हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज तो तत्काल होगा, कैजुअल्टी में आने वाले मरीजों के लिए सभी दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। मरीज की स्थिति को देखते हुए निर्णय लेने को कहा गया है।
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मेडिकल कॉलेज में भी डॉक्टरों को दिनभर अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे ने बताया कि मांजे के घायल मरीजों का ऑर्थोपेडिक और सर्जरी विभाग से सीधा संबंध आता है। इसलिए सर्जरी को कैजुअल्टी को तैयार रहने के निर्देश दिये गये हैं।
मांजे से घाव होने पर रक्तस्राव अधिक होता है। इस हालत में जिस भी जगह पर जख्म हो, उससे रक्तस्राव को रोकने संबंधी उपाय तत्काल करने की सलाह दी गई है। जख्म गंभीर होने पर सीधे अस्पताल लेकर आना ही उचित होगा।






