नागपुर मेडिकल कॉलेज ने कायम की नई मिसाल, पहली रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट की
Nagpur News: नागपुर मेडिकल कॉलेज ने अब सफलता के नए आयाम स्थापित किए है। महाराष्ट्र के सरकारी अस्पताल में पहली बार रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया।
- Written By: प्रिया जैस
नागपुर मेडिकल कॉलेज डॉक्टर्स टीम (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur News: मध्य भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराते हुए स्थानीय शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महाराष्ट्र के किसी भी सरकारी अस्पताल में पहली बार रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। यह आधुनिक और कम आक्रामक प्रक्रिया उन्नत तकनीक और उच्च सर्जिकल सटीकता का प्रतीक है।
अधिष्ठाता डॉ. राज गजभिये ने पत्रकारों को बताया कि मेडिकल में अब तक 250 से अधिक रोबोटिक सर्जरी हो चुकी हैं। मेडिकल अब रोबोटिक ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में प्रवेश कर नई मिसाल कायम कर रहा है। रोबोटिक ट्रांसप्लांट से छोटे चीरे, कम रक्तस्त्राव, जल्दी रिकवरी और कम जटिलताएं होती हैं। यह कम लागत में सरकारी अस्पताल में उपलब्ध हुआ है।
मां ने बेटे को दी किडनी
अब तक सुपर स्पेशियलिटी में 90 किडनी ट्रांसप्लांट किये गये हैं। वहीं 65 ओपन सर्जरी हुई है। 90वां ट्रांसप्लांट रोबोटिक तकनीक से किया गया। यूरोलॉजी विभाग प्रमुख डॉ. धनंजय सेलूकर ने बताया कि एक 63 वर्षीय मां ने अपने 38 वर्षीय बेटे को किडनी दी। किडनी निकालने की प्रक्रिया रोबोटिक के माध्यम से की गई जबकि ट्रांसप्लांट प्रलचित पद्धति से किया गया।
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डॉक्टर्स की टीम ने किया कारनामा
इस समूची प्रक्रिया में डॉ. भूपेश तिरपुडे, डॉ. हेमंत भानरकर, डॉ. विक्रांत अकोलवार, डॉ. गायत्री देशपांडे, डॉ. महेश बोरीकर, डॉ. प्रणाल सहारे, डॉ. निखिलेश जिभकाटे, डॉ. आशुतोष जाधव, डॉ. वैभव नसारे, डॉ. विशाल नरखेडे, डॉ. प्रतीक, डॉ. तुकाराम, डॉ. अर्पित, डॉ. ऋषिकेश, डॉ. पीयूष किम्मतकर, डॉ. वंदना आदमाने, डॉ. मनोज उमरे, डॉ. स्नेहा लुटे, डॉ. पियूष पांचालवार, डॉ. प्रदीप धुमाने, डॉ. सुमित चाहकर आदि ने सहयोग किया।
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मेडिकल की टीम को ट्रांसप्लांट टीम कोऑर्डिनेटर पुरस्कार
अधिष्ठाता ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी में आधुनिक ऑपरेशन थियेटर तैयार किये गये हैं। हार्ट और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। संबंधित विभाग की मान्यता मिल गई है। उपकरणों सहित मैनपॉवर भी उपलब्ध हो गया है। मुंबई के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।
2-3 महीने में सुपर में हार्ट और लिवर ट्रांसप्लांट भी हो सकेगा, ट्रांसप्लांट के मामले में मेडिकल देश के नक्शे पर छा गया है। यही वजह है कि मेडिकल की टीम को ट्रांसप्लांट टीम कोऑर्डिनेटर पुरस्कार घोषित हुआ है। यह पुरस्कार 2 अगस्त को सुबह 11 बजे राष्ट्रपति भवन दिल्ली में एक समारोह में प्रदान किया जाएगा।
