हाई कोर्ट का एक्शन: टीडीआर के खेल में फंसे नागपुर मनपा आयुक्त, हाई कोर्ट ने थमाया अवमानना नोटिस

Nagpur Municipal Commissioner: TDR मामले में नागपुर मनपा आयुक्त को हाई कोर्ट का अवमानना नोटिस। 25 साल पहले जमीन लेकर वादा खिलाफी पर भड़की अदालत। जानें पूरा मामला।
Bombay High Court issues contempt notice to Nagpur Municipal Commissioner over TDR denial to Shramik Society for road acquisition.
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Contempt of Court: नागपुर में विकास कार्यों के लिए जमीन लेने के बाद टीडीआर नहीं दिए जाने पर श्रमिक सोसाइटी की ओर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने टीडीआर देने के आदेश मनपा को दिए थे।

इनका पालन नहीं किए जाने के कारण अब सोसाइटी की ओर से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने मनपा आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया है।

मनपा ने खारिज कर दिया था आवेदन

रिट याचिका पर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए महानगर पालिका को निर्देश दिया था कि वह 'श्रमिक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी' को उसकी अधिग्रहित जमीन के बदले 'ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स' (TDR) प्रदान करे। मनपा द्वारा दिसंबर 2024 में TDR देने के आवेदन को खारिज कर दिया था। जिसे हाई कोर्ट ने पूरी तरह से रद्द कर दिया था। उल्लेखनीय है कि मौजा झिंगाबाई टाकली में स्थित सोसाइटी की लगभग 5150-5200 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा मामला है। इस जमीन का अधिग्रहण मनपा द्वारा 24 मीटर डेवलपमेंट प्लान (डीपी) रोड (अवस्थीनगर चौक से बोरगांव चौक) के निर्माण के लिए किया गया था।

25 वर्ष पहले मनपा ने दिया था आश्वासन

मनपा ने 2 अगस्त 2001 को एक पत्र जारी कर सोसाइटी को आश्वासन दिया था कि मुआवजे के बदले उन्हें TDR दिया जाएगा। मनपा ने अदालत में दलील दी थी कि सोसाइटी का दावा बहुत पुराना है और वे इसके पात्र नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया था।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 300-A के तहत संपत्ति का अधिकार एक संवैधानिक और मानवाधिकार है जिसे मनपा अपनी मर्जी से छीन नहीं सकता। जब मनपा ने जमीन का उपयोग सार्वजनिक कार्य के लिए किया है और पहले TDR देने का लिखित वादा किया था, तो वह अब अपने वादे से पीछे नहीं हट सकता।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि मुआवजे के मामलों में देरी के आधार पर नागरिकों को उनके हक से वंचित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने मनपा के 5 दिसंबर 2024 के उस पत्र को अवैध घोषित कर दिया था जिसके जरिए TDR का आवेदन खारिज किया गया था। अदालत ने मनपा को निर्देशित किया था कि वह सोसाइटी के सदस्यों को उनके द्वारा समर्पित की गई जमीन के बदले निर्धारित नियमों के तहत TDR प्रमाणपत्र जारी करे। इस आदेश का पालन नहीं होने पर अब अवमानना याचिका दायर की गई।

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