अपराध होने का इंतजार कर रही सरकार? एंटी पेपर लीक बिल पर CJP का बया बयान, पैलेट गन मामले पर भी मांगा जवाब

Anti Paper Leak Bill: एंटी पेपर लीक बिल पारित होने पर CJP ने उठाए सवाल! पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका बोले- सरकार का ध्यान केवल सजा पर है, पेपर लीक रोकने के ठोस उपाय नदारद।
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CJP प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका (Image- Social Media)
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CJP on Anti Paper Leak Bill: लोकसभा से बुधवार (29 जुलाई) को एंटी पेपर लीक बिल पारित होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के नए कानून पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका का कहना है कि बिल में पेपर लीक होने के बाद सख्त सजा और जुर्माने पर तो जोर दिया गया है, लेकिन ऐसी घटनाओं को होने से पहले रोकने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं।

जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार का पूरा फोकस अपराध होने के बाद कार्रवाई पर दिखाई देता है, जबकि असली जरूरत ऐसी व्यवस्था बनाने की है जिससे पेपर लीक की घटनाएं ही न हों।

सजा और जुर्माने पर फोकस

उन्होंने कहा, "बिल पढ़ने के बाद यही समझ आता है कि इसमें सजा और जुर्माने को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेपर लीक रोका कैसे जाएगा?" आशुतोष रांका ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने और वितरण से जुड़े वेंडर्स की ब्लैकलिस्टिंग, पूरी प्रक्रिया का डिजिटलीकरण, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना, परीक्षा केंद्रों की निगरानी बढ़ाना और प्रश्नपत्रों की एंड-टू-एंड ट्रैकिंग जैसे उपाय जरूरी हैं।

समस्या की जड़ तक पहुंचना होगा

उन्होंने कहा, "पेपर लीक के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा देना पर्याप्त नहीं है। अगर सरकार वास्तव में इस समस्या का समाधान चाहती है तो उसे इसकी जड़ तक पहुंचना होगा।"

राहुल गांधी के बयान पर भी प्रतिक्रिया

नीट आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर भी CJP ने प्रतिक्रिया दी। आशुतोष रांका ने कहा कि यदि वास्तव में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है तो सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा, "मीडिया रिपोर्ट्स में जिन दस्तावेजों का जिक्र किया जा रहा है, उनमें पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दर्ज होने की बात कही गई है। अगर ऐसा है तो सरकार को बताना चाहिए कि इसकी मंजूरी किसने दी। केवल इनकार करने से सवाल खत्म नहीं होंगे।" रांका ने कहा कि आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता जरूरी है और सरकार को सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए।

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