पार्षद जी, तमीज कहां है? यवतमाल में अधिकारियों ने खोला मोर्चा, बदसलूकी के विरोध में 'काम बंद' आंदोलन

Yavatmal Municipal Council: यवतमाल नगर परिषद में पार्षदों की बदसलूकी के खिलाफ अधिकारियों का 'काम बंद' आंदोलन। कर्मचारियों ने सम्मानजनक माहौल की मांग की। जानें पूरा मामला।
Officers and employees of Yavatmal Municipal Council go on a strike against the misbehavior and abusive language of corporators. Admin work halted.
यवतमाल नगर परिषद कामबंद आंदोलन (सौजन्य-नवभारत)
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Nagar Parishad Strike: यवतमाल नगर परिषद में पार्षदों द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ की जा रही अभद्र भाषा और दुर्व्यवहार के विरोध में बुधवार 11 मार्च को नगर परिषद के सभी अधिकारी और कर्मचारियों ने ‘काम बंद’ आंदोलन शुरू कर दिया। महाराष्ट्र राज्य नगर परिषद संवर्ग अधिकारी संगठन और कर्मचारी संगठन के नेतृत्व में यह आंदोलन किया गया, जिसके चलते प्रशासनिक कामकाज पर बहिष्कार रखा गया।

पिछले कुछ दिनों से कुछ पार्षदों द्वारा कर्मचारियों से रूखे और अपमानजनक तरीके से बात करने तथा कार्यालयीन कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने की घटनाएं बढ़ गई हैं। विशेष रूप से 23 फरवरी को निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता उत्कर्ष टेंभुर्णे को एक पार्षद ने उनके वार्ड के काम को लेकर सबके सामने अपशब्द कहे थे, जबकि उस काम से उनका सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं था।

इसके बाद 11 मार्च को दोपहर करीब 12:23 बजे वहीं पार्षद बाजार अधीक्षक हरीश जाधव के कक्ष में पहुंचे और उन्हें भी अपशब्द कहे। इस घटना के बाद कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने विरोध में काम बंद आंदोलन शुरू कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि इससे पहले भी ऐसी घटनाओं की मौखिक शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराज़गी है।

कर्मचारियों को मुख्याधिकारी का समर्थन

यवतमाल में कर्मचारी संगठनों ने जिलाधिकारी और मुख्याधिकारी को दिए गए ज्ञापन में संबंधित पार्षद के खिलाफ तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की जाए और उन्हें चेतावनी दी जाए। अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित तथा सम्मानजनक वातावरण में काम करने की व्यवस्था की जाए। बार-बार होने वाला हस्तक्षेप और मानसिक उत्पीड़न तुरंत रोका जाए।

इस आंदोलन में मुख्याधिकारी शुभम क्यातमवार सहित नागेश कपाटे, राकेश भोयर, हरीश जाधव, उत्कर्ष टेंभुर्णे सहित कई कर्मचारियों ने हस्ताक्षर कर समर्थन दिया है। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो आगे उत्पन्न होने वाली स्थिति के लिए प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा।

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