एक्सपोर्टरों पर दोहरी मार, मुंद्रा और जेएनपीटी पोर्ट पर फंसे हजारों कंटेनर, जानें किन चीजों पर पड़ेगा बड़ा असर

Export Crisis India: मिडिल ईस्ट युद्ध से विदर्भ का निर्यात ठप! कंटेनर भाड़ा 25 हजार से बढ़कर 2.3 लाख पहुंचा। मुंद्रा और JNPT पोर्ट पर फंसे हजारों कंटेनर। जानें पूरा गणित।
Middle East war halts Vidarbha exports. Container freight jumps from ₹25k to ₹2.3 lakh. 2500 containers stuck at ports. Farmers and traders in deep crisis.
बंदरगाहों पर फंसे कंटेनर (फाइल फोटो)
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Vidarbha Trade News: विदर्भ से फल, सब्जी, चावल, प्रूड प्रोसेस जैसे आइटमों का निर्यात पूरी तरह से ठप पड़ गया है। निर्यात नहीं होने से युद्ध के बीच में यूएई, दुबई के लोगों को खाने के लाले पड़ गए हैं। संकट एकतरफा नहीं है, निर्यातकों को कई मुहाने पर लड़ाई लड़नी पड़ रही है। पहला तो माल नहीं जा रहा है।

दूसरे मार्ग से भेजने के लिए अगर कोई तैयार भी है तो उसे कई गुना अधिक भाड़ा देना पड़ रहा है। इतना ही नहीं शिपिंग लाइन कंपनियां वार रिस्क सरचार्ज और फ्यूल सरचार्ज भी अलग से ले रही हैं जिसके कारण माल भेजना लगभग असंभव सा हो गया है।

2500 कंटेनर विभिन्न पोर्टों पर अटके

क्षेत्र के जानकारों ने बताया कि पिछले 10 दिनों में नागपुर से भेजे गए फल, सब्जी, प्रोसेस फूड, स्टील देश एवं समुद्र के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए हैं। एक अनुमान के अनुसार कंटेनरों की संख्या 2500 से अधिक है। शिपिंग लाइन के लिए काम करने वाली कंपनियां भी हालाकान हो चुकी हैं क्योंकि किसी एक जगह पर नहीं बल्कि देश के अलग-अलग स्थानों में ये अटके पड़े हैं। मुंद्रा, जेएनपीटी, नवा शिवा में इन्हें रोककर रख दिया गया है।

चावल नहीं जाने से संकट बढ़ा

निर्यात कारोबार से जुड़े शिवकुमार राव ने बताया कि खाड़ी देशों में संकट आने से चावल का निर्यात पूरी तरह से ठप पड़ गया है। कंटेनर इतने मंहगे हो गए हैं कि लोगों के लिए भेजना मुश्किल जा रहा है। सामान्य दिनों में एक कंटेनर का भाड़ा 24000-25000 रुपये हुआ करता था लेकिन वर्तमान में एक कंटेनर के लिए 2.3 लाख रुपये लिया जा रहा है। इसके बाद सरचार्ज अलग से वसूल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यूएई का एक बंदरगाह खोला गया है ताकि खाने-पीने की चीजें पहुंच सके, लेकिन लागत इतनी अधिक बढ़ गई है कि लोग निर्यात करने को तैयार नहीं हो रहे हैं।

  • 2500 कंटेनर विभिन्न पोर्टों पर अटके
  • 2500 कंटेनर प्रतिदिन हैंडलिंग
  • 200 कंटेनर पर सिमटा
  • 25000 रुपये प्रति कंटेनर है सामान्य भाड़ा
  • 2.30 लाख पर पहुंचा कंटेनर का भाड़ा

1000 कंटेनर घटकर 200 हुए

उन्होंने बताया कि नागपुर आईसीडी से प्रति दिन लगभग 1000 कंटेनर का एक्सपोर्ट हुआ करता था जो घटकर 200 कंटेनर पर पहुंच गया है। युद्ध के बीच कुछ माल वेस्ट और ईस्ट अफ्रीकी देशों को किसी तरह भेजा जा रहा है। इससे ही स्थिति का सहज अंदाज लगाया जा सकता है।

आयात भी प्रभावित

राव ने बताया कि यही हालात आयात कारोबार का भी है। आयात होने वाले स्क्रैप और रद्दी पूरी तरह से बंद हो गई है। इससे आने वाले दिनों में री रोलिंग मिलों और पेपर उद्योग पर असर पड़ेगा। कुछ कंपनियों का कच्चा माल चीन से आयात होता है, इस पर किसी प्रकार का असर नहीं है लेकिन आयात बंद होने से एक बड़े तबके के उद्योग पर सीधा असर देखा जाएगा।

उनका कहना है कि मुख्य मार्ग और आसपास भारत का ही 45000 कंटेनर फंसे हैं इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि विश्व भर के देशों का कितना माल अटका होगा। सीधा तात्पर्य यह है कि युद्ध रुकने के बाद भी स्थिति सामान्य होने में काफी दिन लगना तय है।

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