नागपुर में बड़ी कार्रवाई: हाई कोर्ट ने ACP और ADTP को लगाई फटकार, मांगा हलफनामा

Maharashtra: धंतोली–रामदासपेठ की समस्याओं पर गठित संयुक्त निरीक्षण समिति की बैठकों में अनुपस्थिति पर हाई कोर्ट ने ACP और ADTP को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने एक सप्ताह में हलफनामा मांगा।
Nagpur High Court
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Nagpur High Court News: हाई कोर्ट ने नागरिकों की समस्याओं से संबंधित जनहित याचिका के मामले में गठित संयुक्त निरीक्षण समिति (ज्वाइंट इन्स्पेक्शन कमेटी) की बैठकों से अनुपस्थित रहने पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्या। रजनीश व्यास ने संबंधित एसीपी (ट्रैफिक) और नगर रचना के सहायक संचालक (एडीटीपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

धंतोली और रामदासपेठ क्षेत्रों के नागरिकों द्वारा सामना की जा रहीं समस्याओं को हल करने के लिए धंतोली नागरिक मंडल ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। अदालत ने इन क्षेत्रों के मुद्दों को हल करने के लिए एक संयुक्त निरीक्षण करने हेतु जेआईसी का गठन किया था।

मनपा आयुक्त और पुलिस आयुक्त को इस समिति के लिए अपने अधिकारियों को नामित करने का निर्देश दिया गया था जिसके अनुसार एसीपी (ट्रैफिक) और एडीटीपी (एनएमसी) को नामित किया गया था।

जानकारी के बावजूद अनुपस्थिति

संयुक्त निरीक्षण 26 अगस्त 2024, 5 सितंबर 2024, 24 अक्टूबर 2024, 6 मार्च 2025, 10 अप्रैल 2025, 25 अप्रैल 2025, 3 जून 2025 और 12 जून 2025 को किया गया था। कोर्ट के आदेश में बताया गया कि समिति के उद्देश्य की पूरी जानकारी होने और इस मुद्दे की गंभीरता से अवगत होने के बावजूद एसीपी (ट्रैफिक) 24 अक्टूबर 2024 और 10 अप्रैल 2025 को अनुपस्थित रहे।

इसी प्रकार नगर रचना विभाग के सहायक संचालक 24 अक्टूबर 2024, 6 मार्च 2025 और 10 अप्रैल 2025 को अनुपस्थित रहे। अदालत ने इस आचरण को ‘चौंकाने वाला’ बताया है। रिपोर्ट में उपस्थिति शीट से पता चला है कि न तो एसीपी (ट्रैफिक) और न ही एडीटीपी ने अपनी अनुपस्थिति के संबंध में कोई पूर्व सूचना दी थी, एडीटीपी द्वारा केवल 9 अप्रैल 2025 को अनुपस्थिति की जानकारी दी थी।

निर्देशों के विपरीत कार्य

न्यायालय ने प्रथमदृष्टया राय व्यक्त की है कि दोनों अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण करने का निर्देश देते समय अदालत द्वारा अपेक्षित सहायता देने में विफल रहकर कोर्ट के निर्देशों के विपरीत कार्य किया है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को इस संदर्भ में अनुपस्थिति के कारणों सहित एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर करने का आदेश भी दिया।

अदालत ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि उपरोक्त तिथियों पर उनकी अनुपस्थिति के लिए अग्रिम अनुपस्थिति नोट जमा न करने का कोई उचित औचित्यपूर्ण स्पष्टीकरण प्रदान नहीं किया जाता है तो न्यायालय संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए आगे बढ़ सकता है।

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