गोरेवाड़ा तालाब के पानी की जांच रिपोर्ट (सौजन्य-नवभारत)
Gorewada Lake Nagpur Report: नागपुर में गोरेवाड़ा तालाब के पानी में सीवेज (गंदा पानी) मिलने और इसके प्रदूषित होने के दावों को महानगरपालिका के अधिकारियों ने वैज्ञानिक तौर पर पूरी तरह से गलत और निराधार बताया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में कांग्रेस के पार्षद शैलेश पांडे ने चित्रों के साथ महापौर नीता ठाकरे को गोरेवाड़ा तालाब में सीवेज का पानी मिलने की जानकारी दी थी।
यहां तक कि इस संदर्भ में मनपा की आम सभा में अधिकारियों द्वारा गलत जानकारी प्रस्तुत किए जाने का आरोप भी लगाया जिसके बाद बुधवार को मनपा की जल प्रदाय विशेष समिति की सभापति दिव्या धुरडे ने उपसभापति विजय (पिंटू) झलके, अधीक्षक अभियंता डॉ. श्वेता बनर्जी और कार्यकारी अभियंता श्रीकांत वाईकर के साथ गोरेवाड़ा तालाब और पेंच-I, II व III जलशुद्धिकरण परियोजनाओं का प्रत्यक्ष दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान सभापति ने इस बात की पुष्टि की कि वर्तमान में गोरेवाड़ा तालाब (Gorewada Lake) से पानी नहीं निकाला जा रहा है। तालाब का जल भंडारण केवल आपातकालीन स्थितियों में वैकल्पिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा गया है। मौके पर पानी साफ दिखाई दिया और समिति के सदस्यों की उपस्थिति में भौतिक-रासायनिक विश्लेषण के लिए पानी के नमूने भी लिए गए।
गोरेवाड़ा तालाब (Gorewada Lake) और खड़क नाला के पानी की गुणवत्ता का विश्लेषण (तुलनात्मक अध्ययन 2019-2026) यह साबित करता है कि सीवेज प्रदूषण के आरोप गलत हैं। रिपोर्ट में दिए गए 5 प्रमुख परीक्षणों ने पानी के पीने योग्य और सुरक्षित होने की पुष्टि की है।
जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) : यह सेंद्रीय प्रदूषण मापने का महत्वपूर्ण घटक है। पानी में बीओडी का स्तर मात्र 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है (2.0 से कम बीओडी अत्यंत स्वच्छ पानी का संकेत है), जबकि सीवेज के पानी में यह स्तर 200–600 मिलीग्राम प्रति लीटर होता है।
घुलित ऑक्सीजन (DO) और जैव विविधता : पानी में 5 मिलीग्राम प्रति लीटर घुलित ऑक्सीजन का स्तर प्रमाणित हुआ है। तालाब में मछलियों की विभिन्न प्रजातियों का जीवित रहना एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। सीवेज होने पर ऑक्सीजन की कमी से मछलियों की मृत्यु (fish kill) होती है जो यहां नहीं पाई गईं।
यह भी पढ़ें – एक ओर राष्ट्रपति, दूसरी ओर गर्भवती! प्रोटोकॉल तोड़ नागपुर पुलिस ने दिखाई इंसानियत, ऐसे बनाया ग्रीन कॉरिडोर
वैज्ञानिक परीक्षण में पानी का पीएच स्तर 8.27 (अनुमेय सीमा 6.5-8.5) पाया गया, जो कि हल्का क्षारीय है और निरोगी जल परिसंस्था का संकेत देता है। वहीं टीडीएस का मूल्य मात्र 198 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला (अनुमेय सीमा <500) जो उत्कृष्ट स्तर का है और सीवेज के कारण होने वाली खनिजों की वृद्धि को नकारता है।
निष्कर्ष के तौर पर कम बीओडी, अमोनिया का अभाव और समृद्ध जलीय जीवसृष्टि से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि पानी गुणवत्ता के निर्धारित मानकों पर खरा उतरा है। इसके साथ ही गोरेवाड़ा तालाब के संरक्षण और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसकी निरंतर निगरानी (मॉनिटरिंग) करने की भी सिफारिश की गई है।