दीक्षाभूमि सौंदर्यीकरण के 3 चरणों के टेंडर फेल, NMRDA को नहीं मिल रही कंपनी, हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
Deekshabhoomi Nagpur NMRDA Beautification: दीक्षाभूमि सौंदर्यीकरण के लिए नहीं मिल रही कंपनी। हाई कोर्ट ने NMRDA को टेंडर फेल होने के कारणों की जांच करने का दिया आदेश। जानें क्या है पूरा मामला।
- Written By: प्रिया जैस
दीक्षाभूमि (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Deekshabhoomi Nagpur NMRDA: नागपुर में विश्व स्तर पर श्रद्धा का प्रमुख केंद्र मानी जाने वाली दीक्षाभूमि के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए ठेकेदार नहीं मिलने का मामला सामने आया है। नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) की टेंडर प्रक्रिया विफल साबित हुई है जिसे गंभीरता से लेते हुए न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने इसके पीछे के सटीक कारणों का पता लगाने का आदेश दिया है।
सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर होना था विकास
दीक्षाभूमि का विकास सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर करने का एक महत्वाकांक्षी प्रकल्प हाथ में लिया गया था। इसके लिए एनएमआरडीए (NMRDA) ने एक सर्वसमावेशी मास्टर प्लान तैयार कर ‘ग्लोबल टेंडर’ प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन इसे अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। बुनियादी सुविधाओं के संबंध में हुई एक बैठक में एनएमआरडीए आयुक्त ने विकास योजना का खाका प्रस्तुत किया।
इस दौरान सामाजिक न्याय मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों के दौरान दीक्षाभूमि के मूल स्तूप को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही हर साल आयोजित होने वाले प्रमुख उत्सवों में आने वाले अनुयायियों की सहूलियत के लिए मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने पर विशेष जोर देने का भी निर्देश दिया गया है।
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3 चरणों के बाद भी नहीं आए ठेकेदार
एडवोकेट शैलेश नारनवरे द्वारा दायर जनहित याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान एनएमआरडीए के वकील ने न्यायालय को यह जानकारी दी। इस परियोजना के लिए ‘प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट’ नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था।
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डिजाइन को अंतिम रूप देने के बाद वैश्विक स्तर पर टेंडर मांगे गए थे लेकिन पहला, दूसरा और तीसरा चरण पूरा होने के बावजूद पर्याप्त ठेकेदार कंपनी आगे नहीं आई है। इस पर अदालत ने एनएमआरडीए को ठेकेदार न मिलने के कारणों की गहन जांच करने और आगे की कार्रवाई के संबंध में हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है।
‘दुबई-सिंगापुर’ की अवधारणा पर न्यायालय का सवाल
सुनवाई के दौरान जब एनएमआरडीए ने दीक्षाभूमि का विकास दुबई-सिंगापुर की तर्ज पर होने की बात कही तो अदालत ने इस शब्द प्रयोग पर ही अपनी शंका व्यक्त की। न्यायालय ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि यह एक अत्यंत प्रतिष्ठित और महत्वाकांक्षी परियोजना है, इसलिए इसके प्रति किसी भी प्रकार की अनदेखी नहीं की जा सकती।
