Nagpur News: काम बंद, 200 मरीज बिना इलाज लौटे, डेंटल कॉलेज में निवासी डॉक्टरों का आंदोलन

Resident Doctors Strike: नागपुर के शासकीय दंत महाविद्यालय में बकाया विद्या वेतन को लेकर निवासी और इंटर्न डॉक्टरों के काम बंद आंदोलन से दो दिनों में करीब 200 मरीज बिना इलाज लौटने को मजबूर हुए।
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resident doctors strike:नागपुर के शासकीय दंत महाविद्यालय (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nagpur Dental College: शासकीय दंत महाविद्यालय व अस्पताल में विद्या वेतन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। निवासी डॉक्टरों के साथ-साथ इंटर्न डॉक्टरों ने भी काम बंद आंदोलन शुरू कर दिया है। इसके चलते पिछले दो दिनों में करीब 200 मरीज बिना इलाज के लौटने को मजबूर हुए हैं। दूर-दराज से आने वाले कई मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कुछ दिन पहले निवासी डॉक्टरों ने अधिष्ठाता कार्यालय के सामने ठिय्या आंदोलन किया था। उस समय छात्रों ने दिनभर काम बंद रखते हुए बकाया विद्या वेतन देने की मांग की थी। तब अधिष्ठाता ने वैद्यकीय शिक्षा विभाग से फॉलो-अप कर जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद डॉक्टरों ने आंदोलन वापस ले लिया था।

डॉक्टरों ने भी आंदोलन शुरू कर दिया

इस बीच अधिष्ठाता कार्यालय की ओर से वैद्यकीय शिक्षा विभाग के सचिव, वैद्यकीय सहसंचालक और वैद्यकीय शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के संचालक को पत्र भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। परिणामस्वरूप अब निवासी डॉक्टरों के साथ-साथ इंटर्न डॉक्टरों ने भी आंदोलन शुरू कर दिया है। शुक्रवार के बाद शनिवार को भी आंदोलन जारी रहा।

निवासी डॉक्टरों के काम बंद आंदोलन के कारण स्कैनिंग, बायोप्सी, ब्लड सैंपलिंग, कंपोजिट, ऑर्थो, प्रोस्थो सहित कई विभागों से मरीजों को लौटाया गया। इसके अलावा नियोजित सर्जरियां भी टालनी पड़ी हैं।

तीन महीने का विद्या वेतन बकाया

बताया गया है कि निवासी डॉक्टरों का लगभग 1.50 करोड़ रुपये का विद्या वेतन बकाया है, जबकि इंटर्न डॉक्टरों का भुगतान अलग से लंबित है। पत्र-व्यवहार के बाद हाल ही में कुछ निधि अस्पताल को प्राप्त हुई, लेकिन इससे वरिष्ठ निवासी डॉक्टरों का केवल एक महीने का वेतन ही दिया जा सकता है। जबकि सभी डॉक्टरों का तीन महीने का विद्या वेतन बकाया है।

डॉक्टरों का कहना है कि विद्या वेतन की यह अनियमितता पिछले दो वर्षों से बनी हुई है। प्रशासनिक नीति से वे बेहद परेशान हैं। अध्ययनरत निवासी डॉक्टरों को उधार लेकर खर्च चलाना पड़ रहा है। कई डॉक्टरों को अपने परिवार की जरूरतों के लिए भी राशि भेजनी होती है, लेकिन तीन महीने का वेतन बकाया होने के कारण अब उनके पास उधारी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

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