भारत में कहां नहीं मनाई जाती है होली? इसकी वजह भी जानिए

Holi Banned Villages In India: भारत में जहां एक ओर होली धूमधाम से मनाई जाती है, वहीं कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां वर्षों से यह त्योहार नहीं मनाया जाता है। आइए जानते हैं इन अनोखे स्थानों के बारे में।
Places Whare Holi Not Celebrated
होली(सौ.सोशल मीडिया)
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Places Whare Holi Not Celebrated:आज चैत्र महीने की शुरुआत के साथ पूरे देश में रंगों का सबसे बड़ा त्योहार होली हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही रंगों की धूम-मस्ती देखने को मिल रही है। बच्चे पिचकारियों से रंग बरसा रहे हैं तो वही युवा डीजे की धुन पर झूमते नजर आ रहे हैं। लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिल रहे हैं और “बुरा न मानो होली है” कहकर पुराने गिले-शिकवे भूल रहे हैं।

जहां पूरा देश गुलाल, रंग और उल्लास में डूबा रहता है, वहीं भारत के कुछ ऐसे गांव भी हैं जहां होली के दिन सन्नाटा पसरा रहता है। पौराणिक मान्यताओं, स्थानीय परंपराओं और कथित श्रापों के कारण इन स्थानों पर वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ अनोखे स्थानों के बारे में।

किन स्थानों में होली नहीं मनाई जाती है?

  • दुर्गापुर

झारखंड के बोकारो जिले में स्थित दुर्गापुर गांव में होली नहीं मनाई जाती हैं। बताया जाता है कि 100 साल पहले यहां के जो राजा के थे उनके पुत्र की मौत होली के दिन हो गई थी। पुत्र शोक के बाद कुछ समय बाद स्वयं राजा का निधन भी होली के दिन हो गया। मृत्यु से पहले राजा ने प्रजा को होली न मनाने का आदेश दिया था। ग्रामीणों का विश्वास है कि यदि कोई इस परंपरा को तोड़ेगा तो विपत्ति या असामयिक मृत्यु हो सकती है।

  • तमिलनाडु

झारखंड के दुर्गापुर गांव के अलावा तमिलनाडु भी होली नहीं मनाई जाती हैं। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में होली उत्तर भारत की तरह नहीं मनाई जाती। जिस दिन उत्तर भारत में फाल्गुन पूर्णिमा की होली होती है, उसी समय तमिल समुदाय ‘मासी मागम’ पर्व मनाता है।

  • गुजरात

गुजरात के बनासकांठा जिले के रामसन गांव में भी लगभग 200 वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। पौराणिक मान्यता है कि वनवास काल में भगवान श्रीराम यहां आए थे। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक अत्याचारी राजा के कुकर्मों से दुखी होकर संतों ने इस गांव को श्राप दे दिया था। तब से गांव में बड़े उत्सव, विशेषकर होली, नहीं मनाई जाती। लोग इसे परंपरा और आस्था का विषय मानते हैं।

  • रूद्रप्रयाग

उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है कुरझां और क्विली गांव। इन दोनों गांवों में पिछले डेढ़ सौ सालों से होली के रंग नजर नहीं आए हैं। यानी यहां होली नहीं मनाई जाती हैं। यहां के निवासी मानते हैं कि उनकी आराध्य देवी, त्रिपुर सुंदरी, को शोर-शराबा और हुड़दंग पसंद नहीं हैं। देवी की भक्ति और उनके प्रति सम्मान के लिए ही होली के दिन इन दोनों गांवों में शांति रहती हैं।

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