क्या महाराष्ट्र में अब नहीं होंगे ड्राई डे! होली-गांधी जयंती पर खुलेगी या बंद रहेगी शराब की दुकानें? जानिए सच

Dry Day Rules: महाराष्ट्र में होली और गांधी जयंती जैसे खास दिनों पर 'ड्राई डे' खत्म होने की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल थीं। आबकारी विभाग ने अफवाहों पर बयान किया है। जानिए खुलेगी या बंद रहेंगी दुकानें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Dry Day On Holi: महाराष्ट्र में होली, मुहर्रम और गांधी जयंती जैसे महत्वपूर्ण दिनों पर शराब की दुकानों को खुला रखने और ‘ड्राई डे’ खत्म करने की खबरों पर अब विराम लग गया है। राज्य के आबकारी आयुक्त ने इन खबरों को पूरी तरह से ‘भ्रामक और फर्जी’ करार दिया है।

क्या था पूरा मामला?

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि महाराष्ट्र सरकार ने अपनी आबकारी नीति में बड़ा बदलाव किया है। इन रिपोर्ट्स में कहा गया था कि होली, मुहर्रम और गांधी जयंती पर शराब की बिक्री पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य अवैध शराब की बिक्री और ब्लैक मार्केटिंग पर लगाम लगाना है। सरकार इस फैसले से राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही है।

ड्राई डे को लेकर आबकारी विभाग का स्पष्टीकरण

इन चर्चाओं के बीच 24 फरवरी को महाराष्ट्र के आबकारी आयुक्त राजेश देशमुख ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने आधिकारिक तौर पर कहा कि ड्राई डे की सूची में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि होली, मुहर्रम और गांधी जयंती पर शराब की दुकानें खोलने की अनुमति देने वाली खबरें पूरी तरह गलत हैं। पुरानी नीति यथावत लागू है और इन दिनों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध जारी रहेगा। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस भले ही यह खबर फर्जी साबित हुई लेकिन इससे पहले इस पर जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।

शुल्क हाईफाई, छुट्टी भी हो कम

इस बीच नागपुर जिला रेस्टोरेंट एंड परमिट रूम एसोसिएशन के प्रमुख राजीव जायसवाल ने कहा कि आज बार और शॉप से सरकार लाखों में शुल्क ले रही है, ऐेसे में सरकार का भी फर्ज है कि दुकानदारों को अधिक से अधिक दिन कारोबार करने की अनुमति दे। इससे सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा और कारोबारियों का कारोबार भी। स्पष्टीकरण से पहले व्यापारी निर्णय (अघोषित) से काफी खुश थे, उन्हें लगा था कि सरकार उचित कदम उठा रही है और कारोबारियों के विषय में विचार कर रही है।

उत्पाद शुल्क विभाग के स्पष्टीकरण के बाद निश्चित रूप से निराशा हुई है। एसोसिएशन अब भी अपनी डिमांड पर अडिग है कि सरकार कुछ छुट्टियां कम करे, ताकि कारोबारियों का पैसा निकल सके। बार-बार उच्च न्यायालय ने भी बोला है कि छुट्टियां क्यों होना चाहिए, लोकल प्रशासन ने छुट्टी घोषित करने के बाद न्यायालय ने कैन्सिल तक की है। न्यायालय का भी मानना है कि लॉ एंड ऑर्डर पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है और उन्हें यह निभानी चाहिए लेकिन प्रशासन बंद के विकल्प को आगे बढ़ाता है।

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