

Nagpur High Court Judges Bungalows: नागपुर 'जनमंच' संस्था द्वारा दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के बाद न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने हाई कोर्ट जजों के बंगलों के निर्माण और मरम्मत कार्य में हो रही देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने की समय सीमा तय कर दी है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सरकारी वकील ने कोर्ट को चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'सुनीत' बंगले का काम 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
वहीं 'सौमित्र' बंगले में फिलहाल बिजली (इलेक्ट्रफिकेशन) का काम बचा हुआ है जिसके लिए 10 से 15 दिनों के अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इसे 15 अगस्त 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट से कुछ और समय की मांग की लेकिन खंडपीठ ने फिलहाल इस अनुरोध को ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि 15 अगस्त के बाद काम की प्रगति देखने के बाद ही किसी प्रकार की मोहलत पर विचार किया जाएगा।
अदालत को यह भी सूचित किया गया कि 'विवेक' बंगले के लिए टेंडर प्रक्रिया 17 जुलाई 2026 को पूरी हो जाएगी जिसके तुरंत बाद वहां काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा 5 नए बंगलों के निर्माण के मुद्दे पर सरकारी वकील ने कहा कि वे 16 जुलाई 2026 को इस संबंध में एक हलफनामा दायर करेंगे। कोर्ट ने डिप्टी चीफ आर्किटेक्ट रंगारी को भी अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
नागपुर मनपा, पीडब्ल्यूडी और एनआईटी द्वारा किए जा रहे इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मानकों की जांच करने के लिए याचिकाकर्ता द्वारा कुछ व्यक्तियों के नाम सुझाए गए हैं। मनपा के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे अपने अधिकारियों से निर्देश प्राप्त करने के बाद 16 जुलाई 2026 को इस विषय पर अपना बयान दर्ज कराएंगे। इससे पहले, कानून और न्याय विभाग की ओर से भी एक हलफनामा लाया गया था। डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ने अदालत से इसकी सही प्रति दाखिल करने की अनुमति मांगी जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
इस बीच एनआईटी ने अदालत को जानकारी दी है कि चिखली देवस्थान परिसर, मानेवाड़ा स्थित मंगलदीप सोसाइटी और अभिजीतनगर में सड़कों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है।
शहर के कई हिस्सों से शिकायतें आई थीं कि सीमेंट सड़कों के कारण घरों के ओटों (प्लिंथ) का स्तर सड़क से नीचे चला गया है। एनआईटी ने बताया कि जहां तकनीकी रूप से सड़क का स्तर कम करना संभव नहीं था, वहां बारिश का पानी सीधे मुख्य गटर में बहाने के लिए 'क्रॉस ड्रेन पाइप' लगाए गए हैं।