सुप्रिया सुले को केंद्र में मंत्री पद या कांग्रेस में बड़ी जिम्मेदारी? शरद पवार के डबल गेम से बढ़ी धड़कनें

NCP Merger Offer NDA: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा धमाका! एनडीए ने एनसीपी के दोनों गुटों के विलय के लिए नया फॉर्मूला तैयार किया है, जिसमें केंद्रीय कैबिनेट में 2 पदों का बड़ा ऑफर शामिल है।
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शरद पवार और सुनेत्रा पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
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NDA Mega Offer NCP Merger Formula: महाराष्ट्र की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां पुरानी प्रतिद्वंद्विता और नए गठबंधन के समीकरण आपस में टकरा रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों शरद पवार गुट और सुनेत्रा पवार गुट को एक साथ आने का बड़ा ऑफर दिया है। इस ऑफर के तहत सुझाव दिया गया है कि एनसीपी के दोनों धड़े आपस में विलय कर लें और फिर एनडीए के सहयोगी के रूप में साथ चलें।

सत्ता का संतुलन और कैबिनेट में दो पदों का लालच

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस विलय को सफल बनाने के लिए भाजपा ने केंद्रीय कैबिनेट में दो महत्वपूर्ण पद देने का भी प्रस्ताव रखा है। यह कदम न केवल महाराष्ट्र में गठबंधन को मजबूती देने के लिए है, बल्कि केंद्र में सत्ता के संतुलन को साधने की एक सोची-समझी रणनीति भी मानी जा रही है। इस सिलसिले में हाल ही में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे दिग्गज नेताओं की उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ अहम मुलाकात भी हुई है।

क्यों पड़ी भाजपा को पवारों की जरूरत?

इस पूरी कवायद के पीछे असली वजह दिल्ली की सत्ता का नंबर गेम है। मोदी सरकार संसद में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक लाना चाहती है, जिसके लिए सदन में दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है। फिलहाल, एनडीए लोकसभा में इस जादुई आंकड़े से 42 वोट और राज्यसभा में 11 वोट पीछे है। एनसीपी के दोनों गुटों के साथ आने से सरकार इस लक्ष्य के और करीब पहुंच सकती है।

विलय की राह में 5 बड़े कांटे

हालांकि, यह विलय इतना आसान नहीं दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इसके सामने कई चुनौतियां हैं:

  • पार्टी के भीतर मतभेद: सत्ता के बंटवारे को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता एकमत नहीं हैं।
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जंग: सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार चाहते हैं कि उनकी मां सुनेत्रा पवार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें और उन्हें महाराष्ट्र का वित्त विभाग मिले।
  • सीनियर लीडर्स की नाराजगी: सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल जैसे नेता चाहते हैं कि पदों का बंटवारा निष्पक्ष हो।
  • शर्तों पर अड़ना: यदि सुनेत्रा गुट अहम विभागों पर अड़ा रहता है, तो समझौता टूट सकता है।
  • शरद पवार की रजामंदी: शरद पवार गुट द्वारा इन सभी शर्तों को स्वीकार करने की संभावना बेहद कम है।

शरद पवार का डबल गेम?

दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार गुट के पास विकल्प खुले हुए हैं। उनके कुछ सांसद और विधायक एनडीए के साथ जाना चाहते हैं, जबकि कुछ कांग्रेस में विलय के पक्ष में हैं। शरद पवार कांग्रेस के साथ तभी जाने को तैयार होंगे, जब सुप्रिया सुले को कांग्रेस में उपाध्यक्ष पद जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी जाए। दूसरी तरफ, सुप्रिया सुले के लिए केंद्र में मंत्री पद की चर्चा भी एनडीए के खेमे से आ रही है।

कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की यह सियासी बिसात अब दिल्ली के मिशन 360 मतलब दो-तिहाई बहुमत पर टिकी है। क्या पवार परिवार फिर से एक होगा या यह दरार और गहरी होगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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