

Agra Cantt RPF Commandant Transfer: उत्तर मध्य रेलवे के आगरा रेल मंडल का आगरा कैंट रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है। यही वह स्टेशन है जहां से हर दिन हजारों देशी और विदेशी पर्यटक ताजमहल की नगरी में प्रवेश करते हैं। लेकिन 12 जुलाई को इसी स्टेशन पर एक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने रेलवे की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
12 जुलाई को करीब 11 बजे हीराकुंड एक्सप्रेस के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर पहुंचने के दौरान चेन पुलिंग और चेन पुलिंग नहीं होने को लेकर डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र चाहर और आरपीएफ के चार कर्मचारियों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद इतना बढ़ गया कि आरपीएफ कर्मियों ने डिप्टी एसएस के साथ मारपीट की और उन्हें घसीटते हुए आरपीएफ पोस्ट तक ले जाया गया। इस दौरान उनके कान का पर्दा फटने की भी बात सामने आई। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और देखते ही देखते मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
डिप्टी एसएस नरेंद्र चाहर के समर्थन में एससीआरएमयू, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन और एक्स सर्विसमैन संगठन खुलकर मैदान में उतर आए। उधर, घटना वाले दिन ही डीआरएम गगन गोयल ने चारों आरोपित आरपीएफ कर्मियों को निलंबित करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी थी। इसके बाद आगरा रेल मंडल कार्यालय पर लगातार धरना-प्रदर्शन का दौर चलता रहा।
इसी बीच पीड़ित अधिकारी की पत्नी डीआरएम कार्यालय पहुंचीं और मीडिया के सामने फूट-फूट कर रो पड़ीं। वहीं उनकी दो बहनें विरोध स्वरूप प्लेटफॉर्म नंबर-1 की रेलवे पटरियों पर लेट गई थीं, जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।
घटनाक्रम के बीच 15 जुलाई को तत्कालीन वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त पी. राजमोहन ने प्रेस वार्ता कर आरपीएफ का पक्ष रखा। हालांकि उस समय यह सवाल भी उठे कि जब मामले की जांच जारी है और वह स्वयं जांच समिति के सदस्य हैं, तब मीडिया के सामने पक्ष रखना कितना उचित है।
गौरतलब है कि "नव भारत" ने प्रेस वार्ता वाले दिन ही यह संकेत दे दिया था कि इस पूरे प्रकरण में आरपीएफ कमांडेंट पर गाज गिर सकती है और उनका तबादला भी संभव है। आखिरकार वही हुआ जिसकी चर्चा थी। गुरुवार देर रात रेलवे प्रशासन ने वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त पी. राजमोहन का तबादला नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे कर दिया, जबकि उनकी जगह वाराणसी से एस.रामकृष्णन को आगरा की जिम्मेदारी सौंपी गई।
हालांकि रेलवे की ओर से तबादले को आधिकारिक रूप से इस विवाद से जोड़कर कोई बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन रेलवे महकमे में इसे आगरा कैंट प्रकरण के बाद हुई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर इस मामले में डिप्टी एसएस पक्ष की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। रेलवे ट्रैक पर विरोध प्रदर्शन और कथित हाथापाई को लेकर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार रेलवे ट्रैक पर लेटने और अन्य घटनाओं को लेकर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिनकी जांच जारी है। साथ ही यह भी आरोप लगाए गए हैं कि विवाद के दौरान आरपीएफ कर्मी की वर्दी फाड़ी गई और पहचान पत्र छीना गया। इन पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल पूरे मामले पर रेल मंत्रालय की सीधी नजर बनी हुई है। अब सबकी निगाहें जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि आगरा कैंट का यह विवाद केवल दो पक्षों के बीच का टकराव नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली और छवि से जुड़ा बड़ा मामला बन चुका है।