नागपुर HC की अधिकारियों को कड़ी नसीहत: खुद को मालिक न समझें, आप लोक सेवक हैं, नागरिकों की सेवा करना आपका काम
Nagpur High Court: नागपुर हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोक सेवकों का दायित्व नागरिकों की सेवा करना है, न कि खुद को उनका मालिक समझना।
- Written By: अंकिता पटेल
लोक सेवक भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में देरी पर नाराजगी,(फोटो: नवभारत फाइल फोटो)
Nagpur High Court Land Acquisition: नागपुर जिले में सुनवाई का अवसर दिए जाने के बावजूद भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 28 (A) के तहत अब तक मुआवजा आदेश पारित नहीं किए जाने को चुनौती देते हुए संजय राठौड़ और अन्य 28 लोगों की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।
याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने कहा कि अधिकारी यह न भूलें कि ‘लोक सेवक’ का अर्थ नागरिकों की सेवा करना है, न कि खुद को उनका ‘मालिक’ समझना। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का मौका भी तभी मिला, जब उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
शपथ का पालन करें अधिकारी
अधिकारी के इस रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी सार्वजनिक कार्यालय को अपना निजी कार्यालय समझकर चला रहे हैं। न्यायाधीशों ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हम उन्हें याद दिलाना चाहते हैं कि ‘लोक सेवक’ शब्द का अर्थ राष्ट्र के नागरिकों को सेवाएं प्रदान करना है और इस अर्थ में वह जनता के सेवक हैं।
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इसके बावजूद हमारा अनुभव यह है कि अधिकारी खुद को नागरिकों के आका के रूप में पेश करते हैं। अदालत ने अधिकारी से यह अपेक्षा जताई कि वह नौकरी से जुड़ते समय ली गई शपथ का पालन करें और देश के नागरिकों की उम्मीदों के अनुरूप अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।
7 दिन का अल्टीमेटम और कार्रवाई की चेतावनी
सरकारी वकील को निर्देश देते हुए हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और कहा कि यदि 7 दिनों के भीतर इस मामले में निर्णय नहीं लिया जाता है, तो अदालत संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करने पर विचार कर सकती है।
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इतना ही नहीं, अदालत ने अधिकारी को चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि वे ‘महाराष्ट्र सरकारी कर्मचारी स्थानांतरण विनियमन और आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में देरी की रोकथाम अधिनियम, 2005 की धारा 10 के प्रावधानों को बारीकी से पढ़ें और इसके गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहें।
