कक्षा 9 की छात्रा ने बच्चे को दिया जन्म, नासिक के एक आश्रम स्कूल का सनसनीखेज मामला, मचा हड़कंप
Nashik Kalwan Ashram School Minor Pregnancy Case: नासिक के कालवन तालुका स्थित मोहंदरी आदिवासी आश्रम स्कूल में कक्षा 9 की नाबालिग छात्रा ने बच्ची को जन्म दिया।
- Written By: अनिल सिंह
नासिक का आदिवासी आश्रम स्कूल (फोटो क्रेडिट-X)
Minor Student Childbirth Nashik Ashram School: महाराष्ट्र के नासिक जिले से एक बेहद झकझोर देने वाली और सनसनीखेज घटना सामने आई है। कालवन तालुका के मोहंदरी स्थित एक सरकारी सहायता प्राप्त आदिवासी निशानी आश्रम स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 9 की एक नाबालिग छात्रा ने एक बच्ची को जन्म दिया है। इस खबर के बाहर आते ही न केवल नासिक जिले बल्कि पूरे राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
यह घटना सीधे तौर पर आश्रम स्कूलों में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा और वहां के प्रबंधन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है। राज्य में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों के बीच इस संवेदनशील मामले ने आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
रिश्तेदार नाबालिग लड़के पर दुष्कर्म का आरोप; आरोपी सुधार गृह भेजा गया
प्रारंभिक जांच और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मोहंदरी आदिवासी आश्रम स्कूल की इस नाबालिग छात्रा के साथ उसके ही एक करीबी रिश्तेदार ने दुर्व्यवहार किया था, जो खुद भी एक नाबालिग लड़का है। पीड़िता के गर्भवती होने और स्कूल प्रबंधन की नजरों से इस बात के छिपे रहने के दौरान ही प्रसव की नौबत आ गई।
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मामला उजागर होने के बाद पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया और इस संबंध में संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी नाबालिग लड़के को हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह (रिमांड होम) भेज दिया है। पीड़ित बच्ची और उसके नवजात शिशु की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस इस पूरे मामले में अत्यधिक गोपनीयता बरत रही है।
जनजातीय विकास विभाग की निगरानी और स्वास्थ्य जांच दावों की खुली पोल
इस संवेदनशील घटना ने एक बार फिर जनजातीय विकास विभाग के दावों की पोल खोल कर रख दी है। नियमानुसार, इन आदिवासी आश्रम स्कूलों में रहने वाले सभी छात्र-छात्राओं की हर महीने नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच (Medical Check-up) की जानी अनिवार्य है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर 9 महीने तक डॉक्टरों, वार्डन और महिला अधीक्षकों की नजर इस छात्रा की शारीरिक स्थिति पर क्यों नहीं पड़ी?
इतने लंबे समय तक इतने गंभीर मामले पर ध्यान न दिया जाना प्रबंधन की बहुत बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। जनजातीय विकास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त दिनकर पवारा ने इस शर्मनाक घटना की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि विभाग ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और लापरवाही बरतने वाले स्कूल स्टाफ के खिलाफ एक गहन विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
छात्राओं की सुरक्षा को लेकर पूरे महाराष्ट्र में कड़े कदम उठाने की मांग तेज
मोहंदरी आश्रम स्कूल की इस घटना के बाद से स्थानीय आदिवासी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पालकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि सुदूर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के आश्रम स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे है, जिसके कारण आए दिन बच्चियां ऐसे शोषण का शिकार होती हैं।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि केवल जमीनी स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करके खानापूर्ति न की जाए, बल्कि इस पूरे रैकेट और प्रशासनिक ढिलाई की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस घटना के बाद राज्य सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह महाराष्ट्र के सभी सरकारी और निजी आश्रम स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) कराए और सीसीटीवी कैमरों व महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती जैसे कड़े कदम तुरंत उठाए।
