नागपुर HC का सख्त रुख: 3 साल बाद भी जवाब न देने पर नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को 50 हजार जुर्माने का नोटिस

Nagpur High Court: तीन साल से जवाब दाखिल नहीं करने पर नागपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर सख्ती दिखाई। अदालत ने नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव से 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूलने पर जवाब मांगा है।
Nagpur HC takes a tough stance: Notice issued to the Principal Secretary of the Urban Development Department imposing a fine of ₹50,000 for failing to respond even after three years.
नागपुर हाईकोर्ट ने जुर्माना वसूलने पर मांगा जवाब,(सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Nagpur Urban Development Department: नागपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जवाब दाखिल न करने पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को इस देरी के लिए उनके वेतन से 50 हजार रुपये का जुर्माना क्यों न वसूला जाए, इसका जवाब दायर करने के आदेश दिए।

महाराष्ट्र राज्य नगर परिषद माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ और अन्य द्वारा हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई। याचिका में दावा किया गया है कि महाराष्ट्र की नगर परिषदों के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को समकक्ष पदों पर कार्यरत अन्य कर्मचारियों की तरह पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और अन्य सेवा लाभ नहीं दिए जा रहे हैं।

तीन साल तक जवाब नहीं, सरकार पर हाईकोर्ट सख्त

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह भेदभाव पूरी तरह से असंवैधानिक है। इसी मामले में अदालत ने 30 मार्च 2023 को नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए स्पष्टीकरण पेश करने का आदेश दिया था।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील ने नगर विकास के प्रधान सचिव की तरफ से जवाब आना बाकी होने का हवाला देते हुए मोहलत मांगी। इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि 30 मार्च 2023 को उन्हें पक्षकार बनाया गया था और सरकार ने नोटिस भी स्वीकार कर लिया था।

फिर भी तीन साल से अधिक समय से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। सरकार के इस रवैये से नाराज होकर अदालत ने सुबह के सत्र की सुनवाई स्थगित कर दी और मामले को दोपहर के सत्र में सुना।

अतिरिक्त मुख्य सचिव की पेशी और आश्वासन

दोपहर के सत्र में नगर विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ। के। एच। गोविंदराज ने वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में हाजिरी लगाई। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि इस प्रकरण में 3 सप्ताह के भीतर निर्णय ले लिया जाएगा।

अदालत ने उनके इस बयान और भूमिका को रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया। कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह लगातार देखा जा रहा है कि जिन मामलों में राज्य सरकार एक पक्षकार होती है, उनमें समय पर हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कई महीने बीत जाने के बाद भी जवाब दाखिल न होना एक बेहद गंभीर मामला है और इससे पूरी न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होती है।

Navbharat Live
navbharatlive.com