अंबाझरी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के पूर्व DGM पर दर्ज FIR, कार्यालय और 4 स्थानों पर तलाशी

Ordnance Factory Ambazari: अंबाझरी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में टेंडर प्रक्रिया में हुए फर्जीवाड़े में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा नागपुर ने पूर्व DGM के खिलाफ मामला दर्ज किया।
Ordnance Factory Ambazari: अंबाझरी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में टेंडर प्रक्रिया में हुए फर्जीवाड़े में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा नागपुर ने पूर्व DGM के खिलाफ मामला दर्ज किया।
पूर्व DGM के खिलाफ मामला दर्ज (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Ordnance Factory Ambajhari: नागपुर में अंबाझरी ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में टेंडर प्रक्रिया में हुए फर्जीवाड़े में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा नागपुर ने पूर्व उपमहाप्रबंधक दीपक लांबा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह मामला नागपुर स्थित यंत्र इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) के उप मुख्य विजिलेंस अधिकारी डीकेटी गुप्ता की शिकायत के बाद दर्ज किया गया।

गुप्ता ने विगत 7 जुलाई को सीबीआई से शिकायत की थी जिसमें उन्होंने आरोप लगाया गया था कि लांबा ने एक निजी फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया जिसे उन्होंने कथित तौर पर एक रिश्तेदार के नाम पर स्थापित किया था। जाली दस्तावेजों का उपयोग करके इस फर्म द्वारा प्रस्तुत निविदाएं मंजूर कीं गईं।

प्रोप्राइटरशिप फर्म की स्थापना

सीबीआई के अनुसार लांबा ने अपने चचेरे भाई मोहित थोलिया के नाम का उपयोग करके ऑटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज नामक एक प्रोप्राइटरशिप फर्म की स्थापना की। ये निविदाएं फर्म द्वारा प्रस्तुत नकली अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रदान की गईं। जांच में फर्म के बैंक खातों और लांबा और उनके परिवार के सदस्यों जिनमें उनके भाई, पत्नी, बहन और मां शामिल हैं, के बीच कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का भी पता चला।

इन लेन-देन से संकेत मिलता है कि लांबा का फर्म में सीधा वित्तीय हित था। सीबीआई अधिकारियों ने आरोपियों के कार्यालय और घरों सहित 4 स्थानों पर तलाशी ली। जांच में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए। इसमें अन्य अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की संलिप्तता का भी संदेह है, इसीलिए बारीकी से प्रकरण की जांच की जा रही है।

मामला दर्ज

सक्षम प्राधिकारी ने लोक सेवक के विरुद्ध जांच आगे बढ़ाने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत आवश्यक अनुमति प्रदान की जिसके बाद सीबीआई ने धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2), 318(4), 336(3), और 340(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है।

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