बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला: गिट्टी-बजरी परिवहन के लिए GPS और महाखनिज परमिट अनिवार्य, बिना कागज जब्त होंगे वाहन

Mining Transport Rules: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गिट्टी-बजरी जैसे गौण खनिजों के परिवहन में महाखनिज का द्वितीयक परमिट व वाहन में GPS अनिवार्य बताया। नियम उल्लंघन पर वाहन जब्ती व जुर्माने की कार्रवाई होगी।
Bombay High Court Ruling: GPS and 'Major Mineral' permits mandatory for transporting crushed stone and gravel; vehicles without documents will be seized.
बॉम्बे हाई कोर्ट गौण खनिज, जीपीएस अनिवार्य (प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI)
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Stone Aggregate Transport Permit: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि गिट्टी, बजरी (स्टोन एग्रीगेट) या स्टोन क्रश जैसे प्रसंस्कृत गौण खनिजों के परिवहन के दौरान 'महाखनिज' प्रणाली से जारी द्वितीयक परिवहन परमिट तथा वाहन में जीपीएस प्रणाली का होना अनिवार्य है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रॉयल्टी चोरी और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन सभी के लिए आवश्यक है। यदि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं तो राजस्व प्रशासन को जुर्माना लगाने और वाहन जब्त करने का पूरा अधिकार है।

मूल रॉयल्टी पास को प्रणाली से जोड़ना आवश्यक

पनवेल के व्यवसायी सलमान अब्दुल लतीफ मदार के ट्रक से गिट्टी बजरी का परिवहन किया जा रहा था। इसी दौरान पनवेल तहसीलदार की उड़नदस्ता टीम ने वाहन की जांच की। जांच में पाया गया कि वाहन के पास वैध द्वितीयक परिवहन परमिट और जीपीएस प्रणाली नहीं थी। इसके बाद प्रशासन ने वाहन जब्त कर लिया और जुर्माना लगाया।

याचिकाकर्ता ने 2,35,039 रुपये का जुर्माना भरकर वाहन छुड़ाया और इस कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उनके एडवोकेट ने दलील दी कि गिट्टी और खड़ी तैयार उत्पाद हैं, इसलिए इन्हें खनिज नहीं माना जा सकता और महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता की धारा 48 के तहत वाहन जब्त करना अवैध है।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ओए चांदुरकर ने अदालत को बताया कि अवैध खनन और रॉयल्टी चोरी रोकने के लिए 1 नवंबर 2023 के शासन निर्णय के अनुसार द्वितीयक परिवहन परमिट अनिवार्य किया गया है।

क्रशर संचालकों और व्यापारियों को 'महाखनिज' प्रणाली पर पंजीकरण करना होता है। मूल रॉयल्टी पास को प्रणाली से जोड़ना आवश्यक है। परिवहन करने वाले वाहन में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य है। जांच के समय याचिकाकर्ता के पास न तो द्वितीयक परमिट था और न ही सामग्री की वैध खरीद का कोई प्रमाण।

चोरी रोकना सरकार की जिम्मेदारी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद  बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और रॉयल्टी चोरी रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह वैध है।

याचिकाकर्ता आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके, इसलिए उन्हें कोई राहत नहीं दी जा सकती। अंत में हाई कोर्ट ने सलमान मदार की याचिका खारिज कर दी। हालांकि उन्हें आवश्यकता होने पर महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता की धारा 247 के तहत अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील करने की स्वतंत्रता दी गई है।

विदर्भ क्वारी ओनर्स ने किया आदेश का स्वागत

विदर्भ क्वारी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन नागपुर के अध्यक्ष अल्ताफ अहमद ने उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह आदेश न केवल राज्य सरकार के हित में है बल्कि स्टोन क्वारी संचालकों, क्रशर मालिकों तथा संपूर्ण निर्माण एवं आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) उद्योग के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।

एसोसिएशन ने स्टोन क्रशिंग उद्योग, निर्माण कार्यों तथा आधारभूत संरचना क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों से इस निर्णय का उसके वास्तविक स्वरूप में स्वागत करने की अपील की है।

पूर्व में क्रशर मालिकों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि अंतिम उपभोक्ता एवं ग्राहक उच्च न्यायालय के पूर्व के उन निर्णयों का हवाला देते हुए जिनमें यह कहा गया था कि तैयार उत्पाद पर रॉयल्टी देय नहीं है, क्रश्ड स्टोन (द्वितीयक उत्पाद) पर रॉयल्टी का भुगतान करने से इंकार कर रहे थे, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि रॉयल्टी खनिज के उत्खनन एवं निकासी के समय कच्चे खनिज पर देय होती है।

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