

Public Exam Fraud Cases: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) समेत सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई अब विशेष अदालतों में होगी। बंबई उच्च न्यायालय ने नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में एक-एक विशेष अदालत नामित करते हुए इन मामलों के त्वरित निपटारे का रास्ता साफ कर दिया है।
उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे ने छत्रपति संभाजीनगर में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एस. वी. पवार और नागपुर में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गुलशन कोल्टे को इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया है। इन अदालतों में NEET सहित विभिन्न सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल, पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और संबंधित अपराधों की सुनवाई की जाएगी।
उच्च न्यायालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह निर्णय केंद्र सरकार के उन निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, जिनमें राज्यों से कम से कम दो प्रमुख जिलों में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024' तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने को कहा गया था। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना और छात्रों का विश्वास बहाल करना है।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत ऐसे मामलों की सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य है। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले परीक्षा घोटालों और पेपर लीक मामलों का तेजी से निपटारा संभव हो सकेगा। न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने से दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही भी सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से NEET, में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में व्यापक बहस छेड़ दी है। इन्हीं घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने कानून को और अधिक प्रभावी बनाया तथा राज्यों को विशेष अदालतों की स्थापना के निर्देश दिए।
उधर, परीक्षा प्रणाली में सुधार, सरकार की जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जून के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन जारी है। इस आंदोलन के समर्थन में देश के कई राज्यों में छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भी प्रदर्शन किए हैं। ऐसे माहौल में बंबई उच्च न्यायालय का यह फैसला परीक्षा अपराधों पर सख्ती और समयबद्ध न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।