RSS स्मारक से दूरी या दबाव की राजनीति? अजित पवार ने महायुति में खींची लकीर! NCP के इरादे साफ

Maharashtra Politics: अजित पवार के आरएसएस संस्थापक हेडगेवार स्मारक न जाने पर राकांपा ने कहा महायुति में शामिल होना राज्य के विकास के लिए है, विचारधारा के लिए नहीं।
Maharashtra Politics: अजित पवार के आरएसएस संस्थापक हेडगेवार स्मारक न जाने पर राकांपा ने कहा महायुति में शामिल होना राज्य के विकास के लिए है, विचारधारा के लिए नहीं।
अजित पवार और सीएम फडणवीस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Ajit Pawar RSS Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक के. बी. हेडगेवार के नागपुर स्थित स्मारक पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नहीं जाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने कहा कि वह राज्य के विकास के लिए महायुति में शामिल हुई है। राकांपा के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा कि पार्टी की विचारधारा छत्रपति शाहूजी महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और बी आर आंबेडकर जैसे समाज सुधारकों की प्रगतिशील सोच पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अजित पवार ने केशव बलिराम हेडगेवार के स्मारक पर जाने से परहेज किया है। रविवार सुबह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सत्तारूढ़ भाजपा एवं शिवसेना के विधायकों ने हेडगेवार के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी, लेकिन अजित पवार और उनके नेतृत्व वाली राकांपा के नेता इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।

एनसीपी ने बताया अपना स्टैंड

इस समय नागपुर में महाराष्ट्र विधानमंडल का शीतकालीन सत्र जारी है। हर साल इस सत्र के दौरान भाजपा के मंत्री और विधायक रेशिमबाग में स्थित स्मृति मंदिर में आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार और दूसरे सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर के स्मारक पर जाते हैं। विधानसभा में 41 विधायकों वाली राकांपा की ओर से पिछले साल केवल विधायक राजू करेमोरे और राजकुमार बडोले स्मृति मंदिर पहुंचे थे। राकांपा प्रवक्ता परांजपे ने दोहराया कि यह पहली बार नहीं है जब अजित पवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक के स्मारक पर जाने से दूरी बनाई है। उन्होंने कहा, “हम अपने सिद्धांतों पर कायम हैं और हमारा ध्यान राज्य के विकास पर है।” विपक्षी दल कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने दावा किया कि राकांपा मंत्रिमंडल बैठकों में आरएसएस की “विचारधारा” सुन रही है और अगर पवार की पार्टी उससे सहमत नहीं होगी, वह सत्ता में नहीं रह सकती।

सचिन सावंत ने किया पोस्ट

सावंत ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में आरएसएस की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने वाली विचारधाराओं को बढ़ावा देता है। शिंदे और शिवसेना विधायकों के हेडगेवार स्मारक जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनका ध्यान “पैसा बांटकर सत्ता हासिल करने और संवैधानिक लोकतंत्र को नष्ट करने” पर है।

कांग्रेस नेता ने यह दावा भी किया कि सौ साल से अधिक समय से अस्तित्व में रहने के बावजूद आरएसएस अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि हिंदुत्व का वास्तविक अर्थ क्या है। उन्होंने कहा, “कम से कम अब उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि हिंदुत्व वास्तव में क्या है।” सावंत ने यह आरोप भी लगाया कि आरएसएस की बैठकों में बौद्धिक विमर्श कम और समाज में विभाजनकारी विमर्श फैलाने पर अधिक जोर दिया जाता है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com