पुणे: 40 साल बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई; टाकली हाजी में ग्राम पंचायत की जमीन भू-माफियाओं से मुक्त

Pune Land Scam: शिरूर के टाकली हाजी में 40 साल बाद ग्राम पंचायत की जमीन से अवैध कब्जा हटा। 1985 में बिना दस्तावेजों के निजी संस्था के नाम की गई, भू-माफियाओं में हड़कंप, पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू है।
Historical win in Shirur as admin recovers prime Gram Panchayat land after 40 years. 1985 illegal registration voided due to lack of documents. Tightening noose around land mafia in Pune district.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Pune Illegal Land Registration News: पुणे में शिरूर तहसील के टाकली हाजी इलाके में प्रशासन ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ग्राम पंचायत की बेशकीमती जमीन को मुक्त करा लिया है। लगभग 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, एक निजी ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा की गई अवैध रजिस्ट्री को रद्द कर दिया गया है, जिससे पूरे तहसील के भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार, टाकली हाजी स्थित यह जमीन वर्ष 1952-53 से लगातार ग्राम पंचायत के स्वामित्व में थी।

लेकिन, वर्ष 1985 में उस समय के एक जांच अधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए इस जमीन को एक निजी 'ग्रामीण विकास संस्था' के नाम पर दर्ज कर दिया था। हैरानी की बात यह है कि इस जमीन के हस्तांतरण के लिए न तो कोई बिक्री समझौता हुआ था, न कोई लीज एग्रीमेंट, और न ही ग्रापं का कोई आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया गया था। इस जांच के दौरान पाया गया कि पुराने रिकॉर्ड में 'ग्रामपंचायत' का नाम स्पष्ट था, लेकिन उस पर काट-छांट कर संस्थान का नाम चढ़ाया गया था। जिला अधीक्षक भूमि अभिलेख ने इस मामले की गहन जांच के बाद पाया कि संस्थान या संबंधित व्यक्ति के पास मालिकाना हक साबित करने वाला कोई भी वैध दस्तावेज नहीं है। 1985 में लिया गया निर्णय पूरी तरह से 'अधिकारबाह्य' और अवैध था।

अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

  • इस खुलासे के बाद स्थानीय स्तर पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि 40 साल पहले इस फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, इस बात की भी जांच हो कि तहसील में ऐसी और कितनी ग्राम पंचायत संपत्तियां हैं। जिन्हें निजी हाथों में अवैध तरीके से सौंपा गया है।
  • इस निर्णय ने एक कड़ा संदेश दिया है कि सत्ता या प्रभाव का इस्तेमाल कर सार्वजनिक संपत्ति को निजी नहीं बनाया जा सकता। टाकली हाजी के ग्रामीणों ने इस फैसले का स्वागत किया है।

प्रशासनिक सतर्कता और भविष्य का रोडमैप

टाकली हाजी का यह फैसला भविष्य के लिए एक 'नजीर' बन गया है। जिला अधीक्षक भूमि अभिलेख की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध दस्तावेजों के सार्वजनिक भूमि पर कब्जा लंबे समय तक नहीं टिक सकता। अब प्रशासन का अगला कदम तहसील के अन्य क्षेत्रों में इसी तरह के संदिग्ध हस्तांतरणों की जांच करना है। ग्रामीणों की जागरूकता और सूचना के अधिकार के बढ़ते प्रयोग ने भू-माफियाओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। यह जीत केवल जमीन की वापसी नहीं, बल्कि आम जनता के सिस्टम पर भरोसे की जीत है।

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