
नागपुर मेट्रो (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Budget 2026 for Nagpur Metro: नागपुर मेट्रो ने इस बार बजट में 1,335 करोड़ रुपये आवंटन करने की मांग की थी लेकिन बजट में मेट्रो को लेकर कोई भी घोषणा नहीं की गई। इससे असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने जानकारी दी कि राज्य को बजट में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये मिला है। इसमें पुणे और मुंबई मेट्रो का भी जिक्र है लेकिन नागपुर मेट्रो को लेकर कोई भी दावा नहीं किया गया है।
इससे यही आशंका जताई जा रही है कि नागपुर मेट्रो खाली हाथ रह गया है। उल्लेखनीय है कि नागपुर मेट्रो ने बड़ी अपेक्षा रखी थी, ताकि सेकंड फेज की गति को और अधिक बढ़ाया जा सके, लेकिन ऐेसा प्रतीत हो रहा है कि बजट में धन का आवंटन नहीं हो पाया है। इस संबंध में मेट्रो के अधिकारियों से संपर्क करने पर उनका कहना है कि अभी तक कोई स्पष्ट नहीं हुआ है लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि नागपुर को भी धन मिला होगा।
यह सोमवार-मंगलवार तक स्पष्ट हो सकेगा। जब एक बार प्रोजेक्ट चालू हो जाता है तो धन रोकने का सवाल ही नहीं उठता है। वैसे भी सरकार की प्राथमिकता है कि प्रोजेक्ट समय पर पूर्ण हो। केंद्रीय बजट 2024-25 में नागपुर मेट्रो को 683 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। मेट्रो को फेज-2 के लिए अब तक 3,300 करोड़ रुपये मिल चुके हैं, जबकि प्रोजेक्ट की लागत 6,708 करोड़ रुपये है।
सेकंड फेज के अधिकांश टेंडर निकल चुके हैं और निर्माण कार्य गति से चालू है। बजट में पर्याप्त राशि मिलना काफी महत्वपूर्ण है, ताकि गति को आगे भी बनाये रखा जा सके। फेज-2 परियोजना के लिए 3,300 करोड़ रुपये में से 2,000 करोड़ सरकार की ओर से मिले हैं जिसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी 775 करोड़ रुपये है।
नागपुर, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) और पुणे को ‘ग्रोथ हब’ के लिए चयनित किया गया है। इससे सिटी को बल मिलेगा। इस योनजा के तहत 5 वर्षों में 5,000 करोड़ का योगदान दिया जाएगा। जानकारों का कहना है कि इस धनराशि से प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में गति मिलेगी। राज्य और केंद्र सरकार के फंड से अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं। उन्हें भी मदद मिलेगी। ‘ग्रोथ हब’ होने का अनेक दृष्टिकोण से फायदा भी होगा।
पुणे की मुला-मुथा नदी के संरक्षण के लिए 230 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इससे प्रोजेक्ट को गति देने में मदद मिलेगी लेकिन नाग नदी के बारे में बजट में कुछ भी नहीं कहा गया है। आश्चर्य यह है कि यह प्रोजेक्ट भी 1,200 करोड़ रुपये का है और पिछली बार इस प्रोजेक्ट के लिए धन का आबंटन किया गया था लेकिन इस बार इस पर भी चुप्पी साध ली गई है।
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सवाल यह उठता है कि एक ओर नागपुर को ग्रोथ हब के रूप में बताया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर आबंटन में बेरुखी अपनाई जा रही है। वो भी तब जब राज्य का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह गृहनगर है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का भी गृह नगर है। दोनों दमदार नेताओं के बाद भी उदासीनता जनता के लिए अबूझ पहेली बन चुकी है।
बजट में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में स्थित पात्र विनिर्माण इकाइयों द्वारा घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए) में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री की सुविधा के लिए एक विशेष एकमुश्त उपाय का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव का लाभ मिहान सेज के उद्योगों को भी बड़े पैमाने पर मिलेगा। निश्चित रूप से सेज के लिए यह एक कारगर कदम साबित होगा।






