

Shivsena Symbol Dispute: असली शिवसेना को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम बहस के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की है।
इसी दिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में चुनाव चिन्ह ‘घड़ी’ को लेकर शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार के बीच चल रहे विवाद पर भी अंतिम बहस होगी। दोनों मामलों का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर गहरा पड़ने की संभावना है।
पिछले दो साल से अधिक समय से शिवसेना और राकां में पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर दो गुटों के बीच कानूनी संघर्ष जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार संकेत दिए हैं कि इन मामलों का शीघ्र निपटारा जरूरी है, लेकिन अब तक तारीख पर तारीख पड़ती रही है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ बगावत कर शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा किया था। इसके कुछ समय बाद अजीत पवार ने भी शरद पवार के खिलाफ कदम उठाते हुए राकां और घड़ी चिन्ह पर अधिकार जताया था।
अब 18 फरवरी को होने वाली अंतिम बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल दोनों पार्टियों की पहचान तय करेगा, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति पर भी असर डालेगा।