Raj Thackeray Birthday Special: करिश्माई भाषण, फायरब्रांड नेता की छवि... फिर भी सत्ता से दूर क्यों MNS प्रमुख?

Raj Thackeray Political Journey: बालासाहेब ठाकरे के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने गए राज ठाकरे ने अलग पहचान बनाई, लेकिन उनकी पार्टी सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। जन्मदिन पर पढ़िए उनकी राजनीतिक यात्रा।
MNS chief Raj Thackeray Birthday Special Political Journey
राज ठाकरे का जन्मदिन आज (डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

MNS Chief Raj Thackeray Biography: महाराष्ट्र की राजनीति में अगर किसी नेता को सबसे प्रभावशाली वक्ताओं में गिना जाता है तो वह हैं राज ठाकरे। उनके भाषणों में शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की झलक दिखाई देती है, उनकी सभाओं में आज भी भीड़ उमड़ती है और उनके बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन जाते हैं।

फिर भी एक सवाल आज भी कायम है इतनी लोकप्रियता और करिश्मे के बावजूद राज ठाकरे मुख्यमंत्री की कुर्सी या सत्ता के करीब क्यों नहीं पहुंच पाए? आइए जानते हैं राज ठाकरे के जन्मदिन पर उनकी राजनीतिक यात्रा, सफलताओं और चुनौतियां।

राज ठाकरे ने बालासाहेब से सीखी भाषण शैली

राज ठाकरे का जन्म 14 जून 1968 को हुआ था। उनके पिता श्रीकांत केशव ठाकरे और माता कुंदा ठाकरे थीं। वे शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के भतीजे हैं। 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में उन्हें शिवसेना का भविष्य माना जाता था। उनकी भाषण शैली, संगठन क्षमता और युवाओं में लोकप्रियता ने उन्हें तेजी से उभरता नेता बना दिया। लेकिन शिवसेना में नेतृत्व को लेकर हुए बदलावों ने उनकी राजनीतिक दिशा बदल दी।

कहा जाता है कि राज ठाकरे ने सार्वजनिक भाषण की कला अपने चाचा बालासाहेब ठाकरे से सीखी और उनका सटीक अनुकरण किया। लोगों के बीच धारा प्रवाह बोलने और व्यंग्य बाण छोड़ने की कला में राज ने महारत हासिल की। आज सोशल मीडिया के दौर में उनके भाषणों की कई क्लिपें वायरल हो जाती हैं।

MNS chief Raj Thackeray Birthday Special Political Journey
बालासाहेब ठाकरे के साथ राज ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)

2005 में छोड़ी शिवसेना, 2006 में चुनाव नया रास्ता

तारीख थी 18 दिसंबर 2005 और जगह- शिवाजी पार्क जिमखाना, राज ठाकरे ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। इसमें उन्होंने वो ऐलान किया जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मचा दिया। राज ने अपने चाचा से अलग होने और शिवसेना छोड़ने का ऐलान कर दिया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज ठाकरे ने कहा था कि उन्होंने सम्मान मांगा था, लेकिन उन्हें सिर्फ अपमान और बेइज्जती मिली। इसके बाद 9 मार्च 2006 को राज ठाकरे ने महाराष्ट्र निवनिर्माण सेना (मनसे) की स्थापना की।

शिवसेना से क्यों अलग हुए राज ठाकरे?

यह फैसला लेना राज ठाकरे के लिए आसान नहीं था। एक समय था जब उन्हें बालासाहेब ठाकरे का उत्तराधिकारी माना जाता था लेकिन धीरे-धीरे शिवसेना में उद्धव का कद बढ़ता गया, जिससे राज ठाकरे की दावेदारी पर असर पड़ा।

दोनों भाइयों के बीच लगातार बढ़ते मतभेद और अधिकारों की लड़ाई 1995 से शुरू हुई थी। साल 1995 में उद्धव ठाकरे पार्टी का काम और फैसलों में बाल ठाकरे की मदद करने लगे। इसके बाद 1997 में हुए BMC के चुनाव में राज ठाकरे को दरकिनार कर ज्यादातर टिकट उद्धव ठाकरे की मर्जी से बांटे गए। बीएमसी चुनाव में शिवसेना की जीत के बाद उद्धव का कद पार्टी में लगातार बढ़ता गया और राज ठाकरे किनारे होते चले गए। इसी वजह से दोनों भाइयों के मतभेद की खाई और गहरी हो गई।

MNS chief Raj Thackeray Birthday Special Political Journey
बालासाहेब ठाकरे के साथ राज ठाकरे व उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)

2009 के विधानसभा चुनाव मनसे ने किया करिश्मा

राज ठाकरे ने 9 मार्च 2006 को महाराष्ट्र निवनिर्माण सेना (मनसे) की स्थापना की। शुरुआती वर्षों में मनसे ने महाराष्ट्र, खासकर मुंबई, ठाणे, नासिक और पुणे में मजबूत पकड़ बनाई। 2009 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 13 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। उस समय माना जा रहा था कि महाराष्ट्र की राजनीति में तीसरी ताकत उभर रही है।

भाषणों की ताकत, लेकिन वोटों में नहीं बदल सकी लोकप्रियता

राज ठाकरे की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उनकी जनसभाएं रही हैं। चाहे मराठी अस्मिता का मुद्दा हो, उत्तर भारतीयों का सवाल, टोल नाके, महंगाई या हिंदुत्व, राज ठाकरे ने हर मुद्दे पर अपनी अलग शैली में लोगों को प्रभावित किया। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी लोकप्रियता हमेशा वोटों में पूरी तरह तब्दील नहीं हो पाई। यही वजह रही कि मनसे कई बार चर्चा में तो रही, लेकिन सत्ता की राजनीति में निर्णायक भूमिका नहीं निभा सकी।

2014 के बाद बदली महाराष्ट्र की सियासत

2014 के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा का तेजी से विस्तार हुआ। इसके बाद मनसे का जनाधार कमजोर पड़ा और पार्टी का दायरा सिमटता चला गया। हालांकि 2022 के बाद हिंदुत्व और मराठी अस्मिता के मुद्दों पर राज ठाकरे ने फिर से आक्रामक राजनीति शुरू की, जिससे उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ी।

20 साल बाद एक हुई ठाकरे बंधु

2023 में लोकसभा चुनाव और 2024 में विधानसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) की करारी हार और राज ठाकरे की मनसे के खराब प्रदर्शन के बाद राज्य के सियासी गलियारों में दोनों भाइयों के एक होने को लेकर काफी चर्चाएं हुई। लोगों का मानना था कि अब दोनों को भाइयों को एक हो जाना चाहिए।

MNS chief Raj Thackeray Birthday Special Political Journey
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)

आखिरकार वह दिन आ गया। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे करीब 20 साल बाद 5 जुलाई 2025 को मुंबई की एक विजय रैली में एक साथ मंच पर आए। इसके बाद दोनों ने 24 दिसंबर 2025 को एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के लिए आधिकारिक गठबंधन का ऐलान किया।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com