
संजय राउत-शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद-एकनाथ शिंदे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Shankaracharya Avimukteshwaranand Controversy: प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर खड़ा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद को लेकर अब शिवसेना यूबीटी सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने एक पोस्ट कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। संजय राउत ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ एकनाथ शिंदे का कनेक्शन उजागर किया है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के इस विवाद को पाखंड और मौकापरस्ती करार दिया है। उन्होंने कहा कि एक ओर मोदी और योगी उन्हें टारगेट बना रहे है और दूसरी ओर एकनाथ शिंदे नकली हिंदू बनकर देख रहे है।
संजय राउत ने अपने पोस्ट में हिंदुत्व समर्थकों पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “पाखंड और मौकापरस्ती: जब शिंदे मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया और उन्हें वर्षा बंगले में आमंत्रित किया। उन्होंने उनके साथ पूजा-पाठ और अनुष्ठान किए।”
Hypocrisy and opportunism: When Shinde was the Chief Minister, he gave Shankaracharya Avimukteshwaranand the status of a state guest and invited him to the Varsha bungalow.
He performed puja and rituals with him. Today, that same Shankaracharya is being subjected to police… pic.twitter.com/3Cvk50ZiQI — Sanjay Raut (@rautsanjay61) January 22, 2026
संजय राउत ने शिंदे को नकली हिंदुत्व बताते हुए आगे लिखा, “आज, उसी शंकराचार्य पर मुख्यमंत्री योगी और मोदी पुलिस से लाठीचार्ज करवा रहे हैं। और शिंदे और उनका नकली हिंदुत्व चुप हैं! वाह, हिंदुत्व समर्थकों-शाबाश!”
मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में बैठकर संगम में स्नान के लिए गए। यहां पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। इससे नाराज होकर अविमुक्तेश्वरानंद बिना स्नान किए संगम तट से और आरोप लगाया कि उनके दर्जनों शिष्यों को पुलिस अधिकारियों ने बुरी तरह पीटा।
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उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें संगम तट से हटाया और कहा कि वे जहां है वहीं रहे। इस पर डिविज़नल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल और पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने प्रेस वार्ता कर साफ किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नहाने से नहीं रोका गया, बल्कि उनकी पालकी को आगे जाने से रोका गया था और उनसे पैदल जाने का अनुरोध किया गया था। देखते ही देखते ये मामला बढ़ गया और अब उनके शंकराचार्य होने की भूमिका पर सवाल खड़ा हो गया।






