BMC में सत्ता की जंग हुई दिलचस्प! मेयर पद 'ओपन कैटगरी महिला' के लिए आरक्षित, अब दिग्गजों के बीच होगा मुकाबला

BMC Mayor Reservation: मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद के आरक्षण की तस्वीर साफ हो गई है। इस बार मेयर की कुर्सी 'सामान्य वर्ग' के लिए आरक्षित की गई है, जिससे समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।
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बीएमसी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai Mayor Reservation: देश की सबसे अमीर नगर निगम, बीएमसी (BMC) में अब वर्चस्व की लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। हालिया आरक्षण लॉटरी के बाद यह आधिकारिक हो गया है कि मुंबई का अगला मेयर 'ओपन कैटेगरी महिला' से होगा। इस फैसले ने शहर के बड़े राजनीतिक चेहरों के लिए मेयर बनने का रास्ता खोल दिया है।

मुंबई नगर निगम में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षित किया जाता है। पिछला कार्यकाल विशिष्ट आरक्षित श्रेणी के पास होने के कारण, नियमानुसार इस बार इसे अनारक्षित (Open Category) रखने का निर्णय लिया गया है। इसका तकनीकी और राजनीतिक अर्थ यह है कि अब कोई भी निर्वाचित पार्षद, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग से आता हो, मेयर पद की दौड़ में शामिल हो सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सभी प्रमुख पार्टियों शिवसेना (दोनों गुट), भाजपा, कांग्रेस और राकांपा के पास अपने सबसे कद्दावर और अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारने की छूट होगी। अब मुकाबला केवल संख्या बल का नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और प्रशासनिक अनुभव का भी होगा।

दिग्गजों की दावेदारी और राजनीतिक बिसात

मेयर पद के ओपन महिला होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब पार्टियों को किसी खास वर्ग के उम्मीदवार की तलाश नहीं करनी होगी, जिससे आंतरिक गुटबाजी बढ़ने या 'पसंद के उम्मीदवार' को मौका न मिल पाने का जोखिम कम हो गया है।

अनुभवी चेहरों को मौका: कई वरिष्ठ पार्षद जो आरक्षित श्रेणी न होने के कारण पिछली बार पिछड़ गए थे, वे अब अपनी दावेदारी मजबूती से पेश करेंगे।

गठबंधन की राजनीति: महाराष्ट्र की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, मेयर पद का चुनाव महायुति और महाविकास आघाड़ी के बीच शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनेगा।

वोट बैंक पर नजर: हालांकि पद ओपन है, लेकिन पार्टियां उम्मीदवार तय करते समय मुंबई के क्षेत्रीय और भाषाई समीकरणों को ध्यान में रखेंगी ताकि आने वाले चुनावों में इसका लाभ मिल सके।

बीएमसी का महत्व और भविष्य की चुनौतियां

बीएमसी का बजट कई छोटे राज्यों के बजट से भी बड़ा होता है, इसलिए यहां का मेयर पद केवल एक पदवी नहीं, बल्कि सत्ता का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। मेयर पद के अनारक्षित होने से अब 'मेरिट' और 'पार्टी निष्ठा' सबसे बड़े पैमाने होंगे।

आने वाले दिनों में नगरसेवकों की जोड़-तोड़ और गठबंधन की बैठकों का दौर शुरू होने वाला है। देखना यह होगा कि एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका की कमान किस अनुभवी नेता के हाथों में जाती है।

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