'गब्बर के ताप से आपको गब्बर ही बचा सकता है', उद्धव-राज पर मंत्री सरनाईक का तंज

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में उद्धव-राज के एक साथ आने के बाद सियासत गरमा गई है। इस घोषणा के बाद मंत्री प्रताप सरनाईक ने दोनों भाइयों के एक होने को लेकर तीखा कंज कसा है।
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में उद्धव-राज के एक साथ आने के बाद सियासत गरमा गई है। इस घोषणा के बाद मंत्री प्रताप सरनाईक ने दोनों भाइयों के एक होने को लेकर तीखा कंज कसा है।
प्रताप सरनाईक (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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मुंबई: राज और उद्धव ठाकरे - इन दोनों भाइयों का मिलन 5 जुलाई को मुंबई के वरली स्थित डोम में आयोजित विजयी समारोह के मंच पर हुआ। लगभग 19 सालों बाद दोनों एक ही मंच पर नजर आए, जिससे पूरे महाराष्ट्र में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। इस मंच से उद्धव ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला।

इसके जवाब में शिंदे गुट के विधायक और मंत्री प्रताप सरनाईक ने शिंदे को एक भावनात्मक पत्र लिखा। मराठी भाषा के नाम पर कुछ स्वार्थी नेताओं ने राजनीति को फिर से गंदा करना शुरू कर दिया है, इसलिए मैं यह पत्र लिख रहा हूं। जो लोग मराठी के हित के लिए एक होने का दावा कर रहे हैं, इन लोगों को न मराठी भाषा से प्रेम है, न मराठी संस्कृति से और न ही मराठी मानुष से।

उन्होंने लिखा कि इनका एकमात्र उद्देश्य है मुंबई मनपा की सत्ता पर कब्जा करना। महाराष्ट्र की जनता जानती है कि इनका असली इरादा क्या है। इनका दिल महानगरपालिका की तिजोरी में अटका हुआ है।

लोगों को गुमराह कर अपना विकास करना चाहते

प्रताप सरनाईक ने आगे कहा कि इन्हीं लोगों ने 'मुंबई महाराष्ट्र से अलग करने' जैसे झूठ फैलाकर जनता को गुमराह किया और वोट बटोरे। दरअसल ये मुंबई नहीं, सिर्फ अपना ही विकास करना चाहते थे। इन्हें पता है कि मुंबई को कोई महाराष्ट्र से अलग नहीं कर सकता, लेकिन फिर भी ये हर बार ऐसा बोगस डर खड़ा करते हैं। उन्होंने उद्धव-राज पर तंज कसते हुए कहा, 'गब्बर के ताप से आपको सिर्फ गब्बर ही बचा सकता है', ऐसा इनका तरीका है। पहले लोगों को डराओ, फिर खुद को ही रक्षक बताओ।

प्यार से सिखायेंगे मराठी

मंत्री प्रताप सरनाईक ने महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है उन्होंने दृढ़ता से कहा कि मीरा-भायंदर में भाषावाद नहीं होना चाहिए। हम विकास के लिए आए हैं, विभाजन के लिए नहीं। अमराठी नागरिकों को आसानी से मराठी सीखने के लिए, शिवसेना की हर शाखा में 12 की पुस्तकें रखी जाएंगी और मराठी शिक्षा मुफ्त में दी जाएगी।

महाराष्ट्र में देखा जाए को दोनों भाइयों के साथ आने से राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चाएं जोरो पर हैं। दोनों ठाकरे बंधुओं के साथ आने के बाद महायुति के लिए स्थानीय निकाय चुनाव में अपनी जगह आसानी से बनाने में मुश्किलें पैदा हो सकती है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि निकाय चुनाव में जनता किसके साथ जाना पसंद करती है।

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