लाडकी बहिन योजना से खस्ताहाल हुआ महाराष्ट्र! वित्त विभाग के सर्वेक्षण में बड़ा खुलासा, बजट में 20% तक की कटौती

Maharashtra Budget Cut: लोकलुभावन योजनाओं और बढ़ते कर्ज से महाराष्ट्र की वित्तीय हालत बिगड़ी। सरकार ने बजट में 5-20% कटौती की, कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक खर्च घटाए।
Maharashtra Financial Crisis Budget Cut
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Maharashtra Financial Crisis: महाराष्ट्र सरकार की 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण' (लाडकी बहिन) जैसी लोकलुभावन योजनाओं और बढ़ते कर्ज के बोझ ने राज्य के वित्तीय स्थिति खस्ताहाल होने लगी है। राज्य सरकार के आय-व्यय का गणित पूरी तरह बिगड़ने के कारण चालू वित्तीय वर्ष के बजट प्रावधानों में 5 से 20 प्रतिशत तक की भारी कटौती करनी पड़ी है।

वित्त विभाग ने 29 जनवरी को इस संबंध में शासकीय परिपत्र जारी किया है। चालू वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में बजट में निधि वितरण पर कैंची चलाई गई है। कार्यालय खर्च, हथियार-गोला-बारूद, ओवरटाइम और मशीनरी रखरखाव जैसे मदों में कटौती की गई है।

राज्य के वर्ष 2025-26 के बजट में 45,891 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा अनुमानित किया गया था। इसके बावजूद बारिश और शीतकालीन सत्र में हजारों करोड़ रुपए की पूरक मांगें मंजूर की गईं। इससे सरकार की राजस्व आय और व्यय का अनुमान पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में मात्र दो महीने शेष रहते हुए सरकार को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है।

कर्मचारी वेतन में 5 प्रतिशत की कटौती

महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग के निर्णय के अनुसार कर्मचारियों के वेतन के लिए निधि वितरण की सीमा 95 प्रतिशत निर्धारित की गई है, यानी पांच प्रतिशत की कटौती की गई है। यह कदम राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।

प्रशासनिक खर्चों में 20 प्रतिशत की कटौती

टेलीफोन, बिजली और पानी के बिल, कार्यालय खर्च, किराया-कर, पेट्रोल-स्नेहक तेल, व्यावसायिक सेवाएं तथा मशीनरी-उपकरणों के रखरखाव एवं मरम्मत के लिए केवल 80 प्रतिशत निधि वितरित की जाएगी। इसका मतलब है कि इन मदों में 20 प्रतिशत की भारी कटौती की गई है।

मजदूरी और ठेका सेवाओं में कमी

मजदूरी और ठेका सेवा के खर्च में 10 प्रतिशत की कमी की गई है। मंत्रियों और अधिकारियों के विदेश दौरे, पुरस्कार, प्रकाशन, कंप्यूटर खर्च, अन्य प्रशासनिक खर्च, विज्ञापन-प्रचार, छोटे निर्माण कार्य, अन्य ठेका सेवाएं, मोटर वाहन और बड़े निर्माण कार्यों के लिए 12 फरवरी 2026 तक ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश सभी विभागों को दिए गए हैं।

इन मदों को मिला 100 प्रतिशत निधि

लेकिन सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण मदों के लिए 100 प्रतिशत निधि आवंटन बरकरार रखा है। पेंशन संबंधी खर्च, ऋण और अग्रिम राशियां, ऋण की वापसी, छात्रवृत्ति, शिक्षा शुल्क और अंतर-लेखा हस्तांतरण के लिए पूरा निधि उपलब्ध कराया गया है। विधायकों की नाराजगी से बचने के लिए विधायक स्थानीय विकास कार्यक्रम के लिए भी 100 प्रतिशत निधि आवंटित किया गया है। यह राजनीतिक दबाव को दर्शाता है।

केवल आवश्यक खर्च के लिए निधि

वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान निर्धारित करने की कार्यवाही चल रही है। उसके निर्धारित होने तक की अवधि के लिए विभागों को आवश्यक खर्च के लिए निधि की जरूरत को ध्यान में रखते हुए निधि वितरण की सीमा निश्चित की गई है। यह निधि बजटीय अनुमान आवंटन नियंत्रण प्रणाली पर वितरित करने की सहमति दी गई है, जैसा कि वित्त विभाग के परिपत्र में उल्लेख किया गया है। यह कटौती महाराष्ट्र की वित्तीय चुनौतियों को स्पष्ट रूप से उजागर करती है और दर्शाती है कि लोकलुभावन योजनाओं का राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com