भारत में हर चौथी सिगरेट गैरकानूनी! सरकार को सालाना 23,000 करोड़ का नुकसान, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

World Anti-Counterfeiting Day: विश्व जालसाजी विरोधी दिवस पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देश के सिगरेट बाजार में 25% हिस्सेदारी अवैध सिगरेट की है। इससे सरकारी खजाने को भारी राजस्व घाटा हो रहा है।
Revenue Loss To India From Illegal Tobacco Trade
सिगरेट से भारत सरकार को सालाना 23,000 करोड़ का नुकसान (सोर्स: AI)
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Revenue Loss To India From Illegal Tobacco Trade: देश में तेजी से पैर पसार रहा प्रतिबंधित सिगरेट और गैर-कानूनी ई-वेप का काला बाजार न सिर्फ जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की जड़ें भी खोखली कर रहा है। वर्ल्ड एंटी-काउंटर फिटिंग डे के मौके पर सामने आए आंकड़ों ने की सच्चाई को उजागर कर दिया है।

राजस्व को भारी चपत: हर चौथी सिगरेट गैर-कानूनी

वर्ल्ड एंटी-काउंटर फिटिंग डे के अवसर पर, फिलिप मॉरिस इंटरनेशनल (PMI) ने अवैध तम्बाकू व्यापार के नेटवर्क को समाप्त करने के लिए सख्त प्रवर्तन और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (TII) के मुताबिक घरेलू बाजार में गैरकानूनी सिगरेट का हिस्सा लगभग एक चौथाई के बराबर है, जिससे हर साल लगभग 23,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। तम्बाकू का गैरकानूनी व्यापार विश्व में एक बढ़ती हुई समस्या है। अवैध सिगरेट की क्रॉस-बॉर्डर स्मग्लिंग की वजह से सरकारों को राजस्व का भारी नुकसान होता है। यह समस्या अब केवल सिगरेट तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रतिबंधित एवं अनियमित ई-सिगरेट और वेप उत्पादों तक भी फैल चुकी है, जो अक्सर रैगुलेटरी जांच से बच निकलते हैं।

12.6 बिलियन डॉलर राजस्व का नुकसान

ई.यू-एसियान बिजनेस काउंसिल (ई.यू-एबीसी) और यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार 6 देशों में पिछले दो सालों (2024-2025) में गैरकानूनी तम्बाकू बाजार से लगभग 12.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न हुआ। गैरकानूनी सिगरेट और अवैध ई-वेप की बिक्री पिछले साल क्रमशः 14 प्रतिशत और 24 प्रतिशत बढ़ी। गैरकानूनी तम्बाकू प्रोडक्ट्स की मांग कम कीमतों और स्मगल किए गए प्रोडक्ट्स की बढ़ती उपलब्धता के कारण होती है। इन प्रोडक्ट्स की सप्लाई एसियान के व्यापक और आपस में जुड़े हुए व्यापारिक मार्गों से होती है, जहां आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण अपेक्षाकृत कमजोर है। स्मगल करके लाए गए ये प्रोडक्ट इंडोनेशिया, कंबोडिया जैसे क्षेत्रों में बनाए जाते हैं। चीन से इनकी अतिरिक्त सप्लाई होती है और मलेशिया, सिंगापुर एवं वियतनाम इसके मुख्य डिस्ट्रीब्यूशन केंद्र हैं।

ई-सिगरेट का बढ़ता मायाजाल

ब्रांड प्रोटेक्शन और सप्लाई चेन इंटैलिजेंस में विशेषज्ञ संगठन एपिरासोल की रिपोर्ट ‘स्मगल्ड पफ्सः इल्लीगल ई-सिगरेट ट्रेड एक्रॉस बॉर्डर्स’ अप्रैल, 2026 के अनुसार अवैध ई-सिगरेट व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, जो तीव्र वृद्धि और जटिल रैगुलेशनों के कारण विश्व के निकोटीन बाजार को एक नया आकार दे रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2024 में गैरकानूनी ई-सिगरेट बाजार का मूल्य 47 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो वैश्विक व्यय के 70 प्रतिशत तथा कुल मात्रा के लगभग तीन-चौथाई के बराबर था, यानी 605 बिलियन सिगरेट के बराबर था।

Revenue Loss To India From Illegal Tobacco Trade
भारत में अवैध तम्बाकू व्यापार (सोर्स: AI)

भारत सरकार कानूनों को सख्ती से लागू कर रही है और स्मगल किए गए प्रोडक्ट्स को पहचानने के लिए रैगुलेटरी क्षमताओं को बढ़ा रही है। लेकिन अवैध तम्बाकू व्यापार के व्यापक परिणामों से निपटना भी जरूरी है। आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में अवैध तम्बाकू का आकार बढ़ता जा रहा है। आज भारत में रैगुलेटरी जांच से बच निकलने वाले प्रतिबंधित और अनरैगुलेटेड प्रोडक्ट्स का परिवेश काफी बड़ा हो चुका है।

भारतीय एजेंसियों का कड़ा प्रहार, करोड़ों के उत्पाद जब्त

हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटैलिजेंस (DRI) ने कई बड़े छापे मारे हैं, जिनमें पूरे देश में ऑपरेशन चलाकर लगभग 3 लाख प्रतिबंधित ई-सिगरेट और वेपिंग डिवाईस जब्त की गईं, जिनकी कीमत लगभग 120 करोड़ रुपये थी। टीआईआई के अनुसार, साल 2026 में एजेंसियों द्वारा लगातार कार्रवाइयां करके अवैध सिगरेट जब्त की गईं, जिनमें कोलकाता में 29.3 लाख सिगरेट, गुवाहाटी में 6 लाख सिगरेट, कोयम्बटूर में 3.48 लाख सिगरेट और चंडीगढ़ में 1.3 लाख सिगरेट और विदेशी सिगरेट के 95 बॉक्स शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध तम्बाकू व्यापार का नेटवर्क व्यापक और लगातार सक्रिय है।

पारदर्शिता और सहयोग ही एकमात्र समाधान

ज्यादा सख्त एंटी काउंटर फिटिंग रैगुलेशनों और सहयोग पर जोर देते हुए, PMI के मैनेजिंग डायरेक्टर नवनील कर ने कहा कि अवैध तम्बाकू व्यापार लगातार बढ़ता और जटिल होता जा रहा है, जिससे सरकार के राजस्व, ग्राहकों की सुरक्षा और रैगुलेटरी इंटीग्रिटी को बड़ा खतरा हो रहा है। जो समस्या पहले केवल नकली या अवैध सिगरेट तक सीमित थी, वह अब तस्करी किए गए, प्रतिबंधित और अनियमित उत्पादों के व्यापक नेटवर्क तक फैल चुकी है, जो नियामकीय निगरानी से बच निकलते हैं।

हाल ही में की गई कानूनी कार्रवाइयों से प्रदर्शित होता है कि यह चुनौती कितना विशाल रूप ले चुकी है। इसलिए लगातार इंटैलिजेंस पर आधारित कार्रवाइयों की जरूरत है। इस समस्या से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए उद्योग और कानूनी संस्थाओं के बीच करीबी सहयोग जरूरी है। साथ ही एक मजबूत सिस्टम भी होना चाहिए।

ट्रैक-एंड-ट्रेस जैसी प्रणालियों के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ाई जानी चाहिए। पीएम इंडिया में हम अपने ग्लोबल अनुभव और स्थानीय पार्टनरशिप्स की मदद से अधिकारियों को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि अनुपालन मजबूती से हो सके, वैध व्यापार की रक्षा हो और एक ज्यादा सुरक्षित बाजार का निर्माण हो।

तम्बाकू के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है भारत

स्मगल की गई तम्बाकू के खिलाफ भारत की लड़ाई बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया में तम्बाकू के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। यहां दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी धूम्रपान करने वाली आबादी निवास करती है। ग्लोबल साउथ के लीडर और इनोवेशन हब के रूप में भारत अपने मजबूत एन्फोर्समेंट के साथ अवैध व्यापार को रोकने और ग्राहकों को नकली प्रोडक्ट्स से बचाने में संगठित क्षेत्रीय प्रयासों का नेतृत्व कर सकता है।

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