
women gig workers (सोर्सः सोशल मीडिया)
Azad Maidan Mumbai Protest: गिग और प्लेटफॉर्म सेवा कर्मियों ने अपने अधिकारों, सुरक्षा और स्थायी रोजगार की मांग को लेकर 26 जनवरी 2026 को देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया था। इसी कड़ी में आज मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को देशभर में प्रत्यक्ष प्रदर्शन की शुरुआत मुंबई स्थित आज़ाद मैदान से हुई। इस प्रदर्शन का नेतृत्व बड़ी संख्या में महिला गिग वर्कर्स ने किया। महिला कर्मियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, सम्मान और समान अधिकारों की मांग को प्रमुखता से उठाया।
यूनियन के अनुसार, देशभर में लाखों गिग वर्कर्स ऐप-आधारित कंपनियों से जुड़े हुए हैं और वे परिवहन, फूड डिलीवरी, घरेलू सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, ब्यूटी और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें श्रमिक का दर्जा नहीं दिया गया है और वे लगातार असुरक्षा, अनिश्चित आय और कंपनियों की मनमानी नीतियों का सामना कर रहे हैं।
यूनियन का कहना है कि महिला गिग वर्कर्स को अन्य कर्मियों की तुलना में अधिक जोखिम और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में जब महिलाएं उचित भुगतान की मांग करती हैं, तो उन्हें अपमान, धमकी और कभी-कभी हिंसा तक झेलनी पड़ती है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें महिला कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं देखी जा सकती हैं।
महिला कर्मियों का आरोप है कि जब वे इन घटनाओं की शिकायत कंपनियों से करती हैं, तो अक्सर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कई बार शिकायत करने के बाद उनकी आईडी ही ब्लॉक कर दी जाती है, जिससे उनकी आजीविका छिन जाती है। यूनियन के अनुसार यह स्थिति न केवल असंवेदनशील है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के अधिकारों का भी उल्लंघन है।

गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी शिकायतों में बिना कारण आईडी ब्लॉक किया जाना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना स्पष्ट वजह बताए या सुनवाई का अवसर दिए उन्हें काम से हटा दिया जाता है। इससे उनकी आय अचानक बंद हो जाती है और परिवार की आजीविका संकट में पड़ जाती है।
यूनियन का आरोप है कि कंपनियों द्वारा अपनाए जा रहे ऑटो-असाइन सिस्टम, रेटिंग सिस्टम और बंडल बुकिंग जैसी व्यवस्थाएं पारदर्शी नहीं हैं और इनके जरिए श्रमिकों पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा रहा है। इसके अलावा, आय दरों में लगातार कटौती, अग्रिम शुल्क और जुर्मानों के कारण गिग वर्कर्स की आमदनी और अधिक अस्थिर हो गई है। कई कर्मचारियों का कहना है कि काम का समय बढ़ने के बावजूद उनकी कमाई घटती जा रही है।
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गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने सरकार से गिग वर्कर्स के लिए एक अलग और व्यापक केंद्रीय कानून बनाने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि जब तक उन्हें श्रमिक का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, बीमा और कानूनी संरक्षण जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित नहीं हो पाएंगी।
इसके साथ ही यूनियन ने मनमानी आईडी ब्लॉकिंग पर रोक, प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली और काम की शर्तों में बदलाव से पहले कर्मचारियों से परामर्श की अनिवार्यता की मांग की है। महिला कर्मियों के लिए ऐप में आपातकालीन सहायता बटन, सुरक्षित कार्यस्थल व्यवस्था और यौन उत्पीड़न से सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी मांग की गई है। साथ ही कार्य क्षेत्र और दूरी की सीमा तय करने तथा दोहरी कैंसिलेशन पेनल्टी जैसी व्यवस्थाओं को समाप्त करने की भी अपील की गई है।






