6 फरवरी को शपथ और 9 फरवरी से नागपुर में स्वास्थ्य सेवाओं पर ‘ताला’! कर्मचारियों ने आर-पार की जंग का किया ऐलान
Health Workers Strike: नागपुर के नए महापौर के लिए बड़ी चुनौती। 9 फरवरी से स्वास्थ्य कर्मियों का 'काम बंद' आंदोलन। 3 महीने से वेतन न मिलने और मानधन में देरी से आक्रोश।
- Written By: प्रिया जैस
स्वास्थ्य कर्मचारी आंदोलन (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur Municipal Corporation: नागपुर मनपा में 4 वर्ष बाद सत्ता स्थापित होने जा रही है। यहां तक कि 6 फरवरी को शहर को नया महापौर भी मिलने जा रहा है किंतु मनपा में महापौर के पहुंचने से पहले ही चुनौतियों ने दस्तक देना शुरू कर दिया है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महानगरपालिका के राष्ट्रीय शहरी आरोग्य अभियान के तहत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 9 फरवरी से अनिश्चितकालीन ‘काम बंद’ आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। पिछले 3 महीनों से वेतन न मिलने और पिछले डेढ़ वर्ष से मानधन में हो रही अत्यधिक देरी के कारण कर्मचारियों ने यह कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है।
आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव में कर्मचारी
नागपुर महानगरपालिका अस्थायी स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष जम्मू आनंद ने कहा कि वेतन में निरंतर देरी की वजह से कर्मचारियों की मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। घर का किराया, बैंक की किस्तें और बच्चों की पढ़ाई के खर्च को पूरा करना अब उनके लिए बेकाबू हो चुका है।
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बढ़ती महंगाई और पेट्रोल के दामों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है जिससे कई कर्मचारी ब्याज पर पैसा लेने और उधारी के दुष्चक्र में फंस गए हैं। यूनियन ने आरोप लगाया कि प्रशासन को कर्मचारियों की गरिमा की कोई चिंता नहीं है और विलंब पगार के कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।
जुलाई से वेतन वृद्धि लागू नहीं
संगठन के अध्यक्ष जम्मू आनंद और सचिव अर्चना मंगरुलकर के नेतृत्व में प्रशासन को सौंपे गए पत्र में बताया गया कि जुलाई 2025 से लंबित 15% वेतन वृद्धि अब तक लागू नहीं की गई है।
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आरआई सत्र, UHND, मोबिलिटी और आरोग्य वर्धिनी (2000 रुपये प्रति माह) जैसे प्रोत्साहन भत्ते वर्ष 2024 से बकाया हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात लेखापालों पर 2-2 केंद्रों का बोझ डाल दिया गया है लेकिन उन्हें पिछले 6-7 वर्षों से अतिरिक्त काम का कोई मुआवजा नहीं दिया जा रहा।
प्रशासन को दी गई सूचना
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि एक तरफ जन आरोग्य व्यवस्था के उच्च अधिकारियों को 7वें वेतन आयोग के अनुसार नियमित वेतन मिलता है वहीं जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को अपने हक के मानधन के लिए बार-बार गुहार लगानी पड़ती है।
इस संबंध में शहर कार्यक्रम व्यवस्थापक डॉ. अश्विनी निकम के माध्यम से आयुक्त आरोग्य सेवा एवं अभियान संचालक, मुंबई को पत्र भेजकर सूचित कर दिया गया है। शिष्टमंडल में कुंदा बुरडे, नीता वनवे, रंजना नागमोते, ममता नंदनवार सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।
