पाकिस्तान में कागजी बाधाओं और डर की वजह से नहीं मिल पा रहा महिलाओं को इलाज: रिपोर्ट

Pakistan Women Health: पाकिस्तान में पहचान कागजों की कमी और सामाजिक भेदभाव महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से दूर रख रहे हैं। अपमान के डर से महिलाएं अस्पताल के बजाय घर पर ही असुरक्षित प्रसव चुन रही हैं।
Pakistan Women Health Crisis: Documentation Barriers and Fear Preventing Access to Medical Care
मुस्लिम महिलाएं (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Women healthcare barriers in Pakistan: पाकिस्तान में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाएं हासिल करना केवल आर्थिक तबाही का मामला नहीं है, बल्कि यह पहचान के संकट से भी जुड़ा है। हालिया मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उचित दस्तावेजों की कमी और सामाजिक भय पाकिस्तानी महिलाओं को अस्पतालों से दूर रख रहे हैं। पहचान पत्र न होने के कारण प्रसूति सेवाओं के दौरान उन्हें अपमान और प्रशासनिक बहिष्करण का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति दर्शाती है कि वहां की स्वास्थ्य प्रणाली महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रही है।

दस्तावेजों का अभाव

पाकिस्तान में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के पास राष्ट्रीय पहचान संबंधी दस्तावेज बहुत कम संख्या में उपलब्ध हैं। पहचान पत्र हासिल करने या उसे अस्पताल में प्रस्तुत करने के लिए वे पूरी तरह अपने पुरुष परिजनों पर निर्भर रहती हैं। बिना कागजों के अस्पताल पहुंचने पर उन्हें इलाज से मना कर दिया जाता है या सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया जाता है।

संस्थागत शक्ति असंतुलन

इमकान वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की CEO ताहेरा हसन के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था महिलाओं को व्यवस्थित रूप से सेवाओं से बाहर कर देती है। यह केवल जागरूकता की कमी नहीं है, बल्कि उस तंत्र से जूझने का डर है जो उनके लिए बनाया ही नहीं गया। इस भय के कारण महिलाएं औपचारिक स्वास्थ्य सेवाओं से सामूहिक रूप से दूरी बना रही हैं।

दाइयों पर निर्भरता

अस्पतालों में दुर्व्यवहार और पूछताछ के डर से महिलाएं आज भी घरों पर पारंपरिक दाइयों के जरिए प्रसव को प्राथमिकता देती हैं। सरकारी अस्पतालों में उमड़ने वाली भीड़ और पुरुष-प्रधान माहौल उन्हें असुरक्षा का अहसास कराते हैं, जिससे वे जोखिम भरा रास्ता चुनती हैं। संस्थागत स्वास्थ्य व्यवस्था को संरक्षण के बजाय एक दंडात्मक अनुभव के रूप में देखा जाता है।

आर्थिक और सामाजिक बोझ

भले ही सरकारी सेवाएं कागजों पर मुफ्त दिखाई दें, लेकिन यात्रा खर्च और जांच शुल्क गरीब परिवारों के लिए भारी बोझ बन जाते हैं। घर के काम और आय अर्जन से दूर रहने की भावनात्मक लागत भी महिलाओं को अस्पताल जाने से रोकती है। निजी अस्पतालों में सिजेरियन ऑपरेशन के बढ़ते दबाव ने परिवारों के मन में और अधिक अविश्वास पैदा किया है।

प्रणाली में सुधार की मांग

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि महिलाएं आधुनिक चिकित्सा के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे अपमान और प्रशासनिक जोखिमों से बचना चाहती हैं। केवल जागरूकता अभियान चलाने से बदलाव संभव नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक गरिमापूर्ण बनाना होगा। जरूरत एक ऐसे तंत्र की है जो दस्तावेजों को इलाज में बाधा न बनने दे और महिलाओं का सम्मान करे।

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