धारावीकरों का पूरा होगा पक्के घर का सपना! गणेशोत्सव में हनुमान मंडल ने उठाए सवाल

Mumbai News: धारावी गणेशोत्सव में श्री हनुमान मंडल ने धारावी की पुरानी यादों को साझा कर पुनर्विकास पर सवाल उठाए। दशकों से अधूरे सपनों के बीच अब सरकार से घर मिलने की उम्मीद जगी है।
धारावी गणेशोत्सव (Pic credit; social media)
धारावी गणेशोत्सव (Pic credit; social media)
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Maharashtra News: एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी के लोग दशकों से पक्के घर का सपना देख रहे हैं। गणेशोत्सव के मौके पर धारावी के काला किला क्षेत्र में श्री हनुमान मंडल ने इस ज्वलंत मुद्दे को अपने पंडाल से फिर एक बार उजागर किया। मंडल ने धारावी की ब्रिटिश काल से जुड़ी ऐतिहासिक झलकियों से लेकर आज तक की तस्वीरें साझा कीं और फिल्मों के माध्यम से पुनर्विकास की कहानी को सामने रखा।

मंडल ने सवाल उठाया कि क्या सरकार वास्तव में धारावीवासियों को पक्का घर देगी? धारावी की संकरी गलियों और गंदगी के बीच जी रहे लाखों लोगों को वर्षों से केवल वादे ही मिले हैं। 1985 में फोटो पास दिए गए, उसके बाद 1992 में 180 वर्ग फुट के घरों का वादा किया गया, 2008 में इसे बढ़ाकर 270 वर्ग फुट तक किया गया, लेकिन हकीकत आज तक अधूरी रही।

2016 में एक और निविदा जारी हुई और 2018 में धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) ने काम संभाला। अब महायुति सरकार के प्रयासों से यह परियोजना रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है और धारावीवासियों को उम्मीद है कि उनका बड़ा घर पाने का सपना अब साकार होगा।

धारावी, जहां चमड़े के उद्योग से लेकर छोटे-छोटे कारखाने अब भी जीवित हैं, मुंबई की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। लेकिन बदले में यहां के लोग कच्चे घर, खुले नाले, गंदगी, भीड़भाड़ और अपर्याप्त सुविधाओं के बीच जीने को मजबूर हैं।

इस साल श्री हनुमान मंडल ने अपने गणेशोत्सव पंडाल में “घर कब मिलेगा?” थीम को चुना। कागज की लुगदी से बनी पर्यावरण-हितैषी गणेश प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा कर मंडल ने साफ संदेश दिया कि पर्यावरण के साथ ही इंसानी जीवन की बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान देना होगा।

फिल्म और प्रदर्शनी के जरिए मंडल ने दिखाया कि धारावी के लोग कैसी उम्मीदों और संघर्षों के बीच जी रहे हैं—पक्के घर, साफ पानी, पर्याप्त शौचालय और बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की आस में। अब जब सरकार पुनर्विकास को लेकर गंभीर दिख रही है, धारावीकरों को भरोसा है कि उनका सपना अब सपना नहीं रहेगा।

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