संजय गांधी नेशनल पार्क में अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई, बोरीवली में पुलिस-कब्जाधारियों में झड़प व पथराव

Mumbai Encroachment: बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कब्जाधारियों व पुलिस के बीच झड़प हो गई। जिससे इलाके में तनाव फैला, जिसे पुलिस बल बुलाकर नियंत्रित किया
Encroachment removal operation at Sanjay Gandhi National Park; clashes and stone-pelting between police and encroachers in Borivali.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sanjay Gandhi National Park: मुंबई बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क में सोमवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कब्जा किए हुए परिवारों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के तहत फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और मुंबई पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई शुरू की थी, जिसका कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध किया।

इस दौरान पुलिस और वन विभाग की टीमों पर पत्थर फेंके गए, जिससे कुछ समय के लिए इलाके में तनाव फैल गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने अतिरिक्त बल बुलाकर हालात पर काबू पाया और कई लोगों को हिरासत में लिया। प्रशासन के अनुसार फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और कानून-व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।

कार्रवाई का विरोध, पथराव से बिगड़े हालात

सुबह से ही संजय गांधी नेशनल पार्क क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीमों को स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों पर पथराव किया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। मुख्य प्रवेश द्वार बंद, प्रशासन की अपील इसी बीच संजय गांधी नेशनल पार्क प्रशासन ने सार्वजनिक सूचना जारी कर बताया कि 27 जनवरी को पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पर्यटकों और आम नागरिकों के लिए बंद रहेगा।

डिप्टी डायरेक्टर (साउथ) की ओर से जारी नोटिस में लोगों से सहयोग की अपील की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके, प्रशासन ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और आगे की कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से की जा रही है।

कोर्ट के आदेश और पुनर्वास की पृष्ठभूमि

प्रेस नौट के माध्यम से पार्क प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि 1997 में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का पालन है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि नेशनल पार्क की फरिस्ट लैंड पर किए गए सभी अतिक्रमण हटाए जाएं और केवल उन्हीं लोगों की पुनर्वास का लाभ मिले, जिनके नाम 1 जनवरी 1995 की मतदाता सूची में दर्ज हैं।

कई हिरासत में, दोबारा कब्जा करने वालों पर सख्ती

इसके तहत पहले चरण में चांदिवली और पवई इलाके में 11,000 से अधिक पात्र परिवारों को आवास आवंटित किए गए। हालांकि 299 परिवारों को मकानों की अनुपलब्धता के कारण दूसरे चरण में पुनर्वास के लिए चिन्हित किया गया।

आदेशों के पूर्ण पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की गई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने एक हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया, ताकि संजय गांधी नेशनल पार्क की सुरक्षा और न्यायालय के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 385 ऐसे परिवार, जिन्हें पहले ही चांदिवली में पुनर्वास का लाभ मिल चुका था, उन्होंने दोबारा पार्क की जमीन पर कब्जा कर लिया, प्रशासन ने इसे पुनर्वास योजना का खुला दुरुपयोग बताया है।

हाई-पावर्ड कमेटी ने ऐसे परिवारों की तत्काल बेदखली के आदेश दिए थे और 17 जनवरी 2026 को नोटिस जारी कर स्वेच्छा से स्थान खाली करने को कहा गया था।

पर्यावरण संरक्षण और निष्पक्ष पुनर्वास पर जोर

कुछ लोगों द्वारा खुद को आदिवासी बताकर कार्रवाई रोकने की कोशिश को भी प्रशासन ने खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने फैसलों में स्पष्ट किया जा चुका है कि मूल आदिवासी आबादी का पुनर्वास पहले ही किया जा चुका है,

पुनर्वास के लिए कार्रवाई जरूरी

प्रशासन का कहना है कि जब तक पुनर्वास योजना का दुरुपयोग करने वालों को नहीं हटाया जाएगा, तब तक वास्तविक पात्र परिवारों को न्याय नहीं मिल पाएगा।

कानून का पालन, पर्यावरण संरक्षण और निष्पक्ष पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई जरूरी है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग की टीम इलाके में तैनात है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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