
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Mumbai High Rise Buildings: मुंबई के पूर्व उपमहापौर और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखकर शहर में अत्याधिक ऊंची इमारतों को दी जा रही मंजूरी पर चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि मुंबई फायर ब्रिगेड की सीमित क्षमता के बावजूद 100 से अधिक मंजिलों वाली इमारतों को मंजूरी देना जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
पत्र में बताया गया है कि मुंबई फायर ब्रिगेड के पास केवल 34 मंजिल तक आग बुझाने और बचाव कार्य करने की क्षमता है। विभाग द्वारा खरीदे जा रहे सबसे आधुनिक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म भी अधिकतम 104 मीटर यानी लगभग 34-35 मंजिल तक ही पहुंच सकते हैं।
बडाला आइकॉनिक टॉवरः एमएमआरडीए के अधिकार क्षेत्र में प्रस्तावित यह इमारत 100 से अधिक मंजिल और 526 मीटर ऊंची होगी,
महालक्ष्मी रेसकोर्स पुनर्विकासः इस परियोजना में 125 मंजिला आवासीय टॉवर (लगभग 486 मीटर) शामिल है।
राजेश शर्मा ने आरोप लगाया है कि ये मंजूरियां महाराष्ट्र अग्नि निवारण और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, 2006 के वैधानिक प्रावधानों का उल्लघन करती है। उन्होंने कहा कि बीएमसी और राज्य सरकार फायर विभाग की अक्षमता से अनजान नहीं हो सकते।
क्योंकि यह रिकॉर्ड में है। इस प्रकार हर नई अति-ऊंची इमारत की मंजूरी न केवल त्रुटिपूर्ण है, बल्कि अनैतिक और संभावित रूप से आपराधिक है।
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पत्र में उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए तीन प्रमुख मांगे रखी गई हैं। 34 मंजिल से ऊंची सभी इमारतों की मंजूरी तब तक निलंबित करें जब तक अग्निशमन क्षमताओं में सुधार न हो जाए, वर्तमान फायर रिस्पांस सीमा से अधिक प्रस्तावों पर रोक लगाई जाए।






