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अब एडॉप्शन के लिए नहीं काटने होंगे कोर्ट के चक्कर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कलेक्टर के अधिकार पर लगाई मुहर
Child Adoption Process: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बच्चों को गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया में जिला कलेक्टर की भूमिका को सही ठहराते हुए 2021 के कानून संशोधन को वैध माना है, जिससे अब यह प्रक्रिया तेज होगी।
- Written By: आकाश मसने

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bombay High Court On Child Adoption Process: बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को लेने बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय ने में कहा है कि दत्तक (एडॉप्शन) प्रक्रिया की सुनवाई करने और उस पर निर्णय लेने के लिए जिला कलेक्टर सक्षम हैं और उन्हें यह अधिकार दिया जा सकता है। अदालत ने बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम में 2021 में किए गए संशोधन को भी वैध ठहराया है, जिसके तहत दत्तक आदेश देने का अधिकार अदालतों से हटाकर जिला कलेक्टर को दिया गया था।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टर कानून के प्रावधानों को लागू करने और संभावित दत्तक अभिभावकों की पात्रता तय करने में पूरी तरह सक्षम हैं। अदालत ने कहा कि बाल कल्याण से जुड़े मामलों में जिला कलेक्टर की भूमिका पर संदेह करना गलत है।
क्यों हुआ था विवाद?
यह मामला दो दंपतियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने 2021 के संशोधन को चुनौती दी थी। संशोधन में ‘न्यायालय’ शब्द की जगह ‘जिला कलेक्टर’ और ‘कार्यकारी प्राधिकारी’ शब्द शामिल किए गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दत्तक प्रक्रिया एक न्यायिक कार्य है और इसे कार्यपालिका को सौंपना उचित नहीं है।
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याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया था कि जिला कलेक्टर के पास कानूनी विशेषज्ञता की कमी हो सकती है और इससे दत्तक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। वहीं केंद्र सरकार ने इस संशोधन का बचाव करते हुए कहा कि अदालतों में मामलों के लंबित रहने से दत्तक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होती थी, जिसे दूर करने के लिए यह बदलाव आवश्यक था।
कलेक्टर की क्षमता पर संदेह करना उचित नहीं
बॉम्ब हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि यह संशोधन दत्तक प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की आपत्ति को ‘आधारहीन’ करार दिया। फैसले में यह भी कहा गया कि जिला कलेक्टर जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होते हैं और कानून व्यवस्था, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा प्रशासनिक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए उनकी क्षमता पर संदेह करना उचित नहीं है। बंबई उच्च न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर जिला कलेक्टरों को दत्तक प्रक्रिया से जुड़े मामलों के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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क्या है बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया?
भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया कानूनी तौर पर सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) के माध्यम से पूरी की जाती है। इच्छुक माता-पिता को चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स इन्फॉर्मेशन एंड गाइडेंस सिस्टम (CARINGS) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। इसके बाद विशेष गोद ग्रहण एजेंसी (SAA) माता-पिता की होम स्टडी करती है। बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेने योग्य घोषित करने के बाद माता-पिता को बच्चे की प्रोफाइल दी जाती है। वे 96 घंटों में बच्चे को रिजर्व कर सकते हैं।
Bombay high court upholds district collector power in child adoption process
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