नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: उम्रकैद की सजा काट रहे शरद कलसकर को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली जमानत, जानें पूरा मामला

Narendra Dabholkar Murder Case: बॉम्बे हाई कोर्ट ने तर्कशास्त्री नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के दोषी शरद कलसकर को जमानत दे दी है। निचली अदालत ने उसे 2024 में उम्रकैद सुनाई थी, जिसे उसने चुनौती दी है।
Sharad Kalaskar Bail In Narendra Dabholkar Murder Case
बॉम्बे हाईकोर्ट, इनसेट- नरेंद्र दाभोलकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Sharad Kalaskar Bail In Narendra Dabholkar Murder Case: बंबई उच्च न्यायालय ने 2013 में तर्कवादी और अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में निचली अदालत द्वारा दोषी करार दिये गए शरद कलस्कर को बुधवार को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति रणजीतसिंह भोंसले की पीठ ने उसे 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। इस संबंध में जारी आदेश की विस्तृत प्रति बाद में उपलब्ध कराई जाएगी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत से जमानत देने के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन पीठ ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। कलस्कर पर वामपंथी नेता और तर्कवादी गोविंद पानसरे की हत्या का मुकदमा भी चल रहा है।

पिछले साल अक्टूबर में उच्च न्यायालय ने उसे इस मामले में जमानत दे दी थी। दाभोलकर मामले में जमानत मिलने के बाद, कलस्कर जमानत की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जेल से रिहा हो सकता है।

कौन थे नरेंद्र दाभाेलकर?

नरेंद्र दाभोलकर महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक थे। उनकी संस्था अंधविश्वास के खिलाफ कार्य करती है। 20 अगस्त 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान दो मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मारकर नरेंद्र दाभोलकर हत्या कर दी थी।

CBI कर रहीं थी जांच

नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले (Narendra Dabholkar Murder Case) की जांच शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन उनकी बेटी मुक्ता दाभोलकर द्वारा उच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद, 2014 में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी। सत्र न्यायालय ने 10 मई, 2024 को सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को दाभोलकर की हत्या का दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, उन्हें सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया।

निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में वीरेंद्र सिंह तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को भी बरी कर दिया था। कलस्कर ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी सजा को चुनौती दी। उसने अधिवक्ता शुभादा खोट के जरिये दाखिल अर्जी में सुनवाई लंबित रहने के दौरान जमानत देने का अनुरोध किया। मुक्ता दाभोलकर ने भी अंदुरे और कलस्कर को यूएपीए के आरोपों से बरी करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com