Maharashtra: बीएमसी चुनाव नाका मजदूरों के लिए सौगात, दिहाड़ी हुई दोगुनी

BMC Election 2026: बीएमसी चुनाव के दौरान नाका मजदूरों की मांग बढ़ गई है। राजनीतिक रैलियों में शामिल होने पर उन्हें 1500–1600 रुपये दिहाड़ी के साथ भोजन भी दिया जा रहा है।
Daily Wage Worker
दिहाड़ी मजदूर (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai News In Hindi: नाका मजदूरों के लिए बीएमसी चुनाव किसी सौगात से कम नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान राजनैतिक पार्टियों को भीड़ दिखाने और उम्मीदवारों को अपने कारवां के पीछे झंडा-डंडा उठाने के लिए इन्हीं मजदूरों का सहारा लेना पड़ता है।

इस जरूरत को पूरा करने का काम कई जगहों पर लगने वाले नाका पर मजदूरी की तलाश में खड़ा रहने वाले दिहाड़ी मजदूर करते हैं। मुंबई में ताड़देव, खार, कांदिवली, सांताक्रुज, दादर, कुर्ला आदि इलाकों में दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूरों की सुबह 8 बजे से मंडियां लगती हैं, जहां से ठेकेदार लोग घरों में मजदूरी करने के लिए इन लोगों को ले जाते हैं।

ये मजदूर खासकर भवन निर्माण आंतरिक और बाहरी कार्यों जैसे फर्नीचर, बुड पॉलिश, पेंटर, राजमिस्त्री, मिट्टी खोदने वाले काम के लिए तैयार खड़े रहते हैं। इनकी दिहाड़ी 800 से 1000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से होती है। ठेकेदार व छोटे बिल्डर, निर्माणाधीन इमारतों में काम करने के लिए इन्हीं मंडियों पर पूरी तरह आश्रित होते हैं।

रैलियों में शामिल होने के लिए तैयार मजदूर

  • नवंबर और दिसंबर महीने में शादी का मौसम बीतने के बाद अब इन नाकों पर मजदूरों की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ गई है, लिहाजा इन मजदूरों को अब सप्ताह में दो तीन दिन ही काम मिल रहा है। वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग अब प्रचार करने के लिए दिहाड़ी मजदूरों को 12 दिनों के कॉन्ट्रैक्ट पर से जाना शुरू कर दिए है। दिहाड़ी मजदूरों के मुताबिक आम दिनों में जहां 700-800 रुपए दिहाड़ी मिलती थी, अब इन मजदूरों की 1500-1600 रूपये दिहाड़ी मजदूरी के साथ नाश्ता और भोजन भी मिलेगा।
  • अपने सामान्य दिनों के कामों को छोड़कर मजदूर भी खुशी-खुशी राजनैतिक दलों रैलियों में शामिल होने के लिए तैयार है। एक मजदूर ने बताया कि राजनैतिक दलों का प्रचार करने के लिए अच्छी खासी दिहाड़ी मजदूरों को मिल रही है। लीस, विस और अब बीएमसी चुनाव में दस-बारह दिनों में ही करीब डेढ़ महीने की कमाई भी हो जाएगी।
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