विपक्ष के आगे झुकी सरकार, आदित्य ठाकरे बोले- नहीं रहा भरोसा, अब दिल्ली के...

महाराष्ट्र में सरकार ने तीन भाषा सूत्र को लागू करने का फैसला रद्द कर दिया है। सरकार के फैसले के बाद आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह विपक्ष और मराठी जनता की ताकत है, जिसके कारण ये फैसला वापस लिया गया।
महाराष्ट्र में सरकार ने तीन भाषा सूत्र को लागू करने का फैसला रद्द कर दिया है। सरकार के फैसले के बाद आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह विपक्ष और मराठी जनता की ताकत है, जिसके कारण ये फैसला वापस लिया गया।
आदित्य ठाकरे (सौजन्य-एएनआई)
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मुंबई: शिवसेना यूबीटी के विधायक आदित्य ठाकरे ने सोमवार को दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार ने प्राथमिक कक्षाओं में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाने पर अपना फैसला विपक्ष और जनता के दबाव के कारण वापस ले लिया। आदित्य ठाकरे ने विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे, भास्कर जाधव और विपक्षी विधायकों के साथ विधान भवन की सीढ़ियों पर ‘मी मराठी' (मैं मराठी हूं) लिखी स्लेट लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

विधान भवन परिसर में आदित्य ने कहा कि दबाव ने सत्ता पर विजय पा ली है। राज्य विधानसभा का मानसून सत्र सुबह शुरू हुआ और यह 18 जुलाई तक जारी रहेगा। महाराष्ट्र के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी भाषा को शामिल करने के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच राज्य मंत्रिमंडल ने ‘त्रि-भाषा' नीति पर सरकारी आदेश को रद्द कर दिया।

विपक्ष के दबाव में लिया फैसला

ठाकरे ने दावा किया कि सत्ता में होने के बावजूद सरकार को जनता, विपक्ष और हिंदी थोपे जाने का विरोध करने वाले अन्य लोगों के दबाव के कारण अपने ही दोनों जीआर को वापस लेना पड़ा। आदित्य ने कहा कि हम सरकार पर यह दबाव तब तक बनाकर रखेंगे जब तक वह लिखित में कोई आधिकारिक और औपचारिक निर्णय नहीं जारी कर देती। हमें अब इस सरकार पर भरोसा नहीं रहा। मराठी लोगों की एकता को दिल्ली के सामने प्रदर्शित करना होगा।

जनभावना से बेखबर सरकार

सरकार के इस फैसले की मंशा के बारे में पूछे जाने पर आदित्य ने आरोप लगाया कि भाजपा और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना, उद्धव और राज ठाकरे के बीच किसी भी तरह के मेल-मिलाप को रोकने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है लेकिन अगर वे सोचते हैं कि वे मराठी गौरव को विभाजित कर सकते हैं तो वे गलत हैं।

एनसीपी-एसपी के नेता जयंत पाटिल ने दावा किया कि हिंदी को लागू करने के मुद्दे पर सरकार का फैसला पलटना दर्शाता है कि वह जनभावना से कितनी बेखबर है। सदन की कार्यवाही श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुई, लेकिन विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि वह सरकार को कृषि ऋण माफी, फसलों के लिए उचित मूल्य, महंगाई, रोजगार, शिक्षा और कथित प्रशासनिक अनियमितताओं जैसे विभिन्न मुद्दों पर घेरेगा।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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