शिंदे Vs एनसीपी: स्वीकृत पार्षद पद के लिए छिड़ी जंग, प्रकाश सर्वे और कप्तान मलिक के बीच फंसा पेंच

BMC Nominated Councilor Dispute: BMC में स्वीकृत पार्षद पद के लिए एनसीपी ने कप्तान मलिक का नाम आगे बढ़ाया है। शिवसेना की दो सीटों में से एक पर दावे से महायुति में राजनीतिक तनाव।
Kaptan Malik NCP And Eknath Shinde
Kaptan Malik NCP And Eknath Shinde (फोटो क्रेडिट-X)
Updated on

Eknath Shinde Shiv Sena BMC Seats: मुंबई नगर निगम (BMC) में सत्ता की बागडोर संभालने के बाद अब भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन के भीतर आंतरिक खींचतान शुरू हो गई है। नगर निगम की विभिन्न समितियों और विशेष रूप से 'स्वीकृत पार्षद' (Nominated Councilor) के पदों के लिए लॉबिंग ने जोर पकड़ लिया है। शिंदे की शिवसेना के पास वर्तमान में 29 निर्वाचित पार्षदों का बल है, जिसके आधार पर उन्हें कोटे से दो स्वीकृत पार्षद पद मिलने हैं। हालांकि, गठबंधन की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने इनमें से एक सीट पर अपना दावा ठोककर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सामने बड़ी राजनीतिक दुविधा खड़ी कर दी है।

पर्दे के पीछे की इस उठापटक ने महायुति के भीतर के समीकरणों को गरमा दिया है। जहाँ शिवसेना अपने वफादार नेताओं को मौका देना चाहती है, वहीं एनसीपी ने 'मलिक कनेक्शन' के जरिए अपना पत्ता खेलकर भाजपा की पेशानी पर बल ला दिए हैं।

एनसीपी का दांव: कप्तान मलिक के नाम पर रार

मुंबई नगर निगम में बहुमत जुटाने के लिए महायुति ने एनसीपी के तीन पार्षदों का समर्थन लिया था, लेकिन अब यही समर्थन शिंदे के लिए गले की हड्डी बनता दिख रहा है। एनसीपी ने एक स्वीकृत पार्षद सीट की मांग करते हुए पूर्व पार्षद और नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक का नाम आगे बढ़ाया है। नवाब मलिक के साथ जुड़े विवादों और भाजपा के कड़े विरोध को देखते हुए कप्तान मलिक का नाम सामने आना गठबंधन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एनसीपी का तर्क है कि वे गठबंधन के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं, इसलिए उनके प्रतिनिधि को मौका मिलना ही चाहिए।

शिवसेना की दुविधा: अपनों को संभालें या सहयोगियों को?

शिंदे की शिवसेना के भीतर स्वीकृत पार्षद पदों के लिए पहले से ही लंबी फेहरिस्त तैयार है। विधायक प्रकाश सर्वे के बेटे और दहिसर के पूर्व पार्षद बालकृष्ण ब्रीद के नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में पहले से ही जोरों पर है। एकनाथ शिंदे के लिए मुश्किल यह है कि यदि वे एनसीपी की मांग मानते हैं, तो उन्हें अपने ही खेमे के किसी एक दिग्गज नेता का पत्ता काटना होगा। इससे पार्टी के भीतर असंतोष फैलने का खतरा है। वहीं, एनसीपी को नाराज करना नगर निगम में स्थिरता के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।

भाजपा का रुख और 'मलिक फैक्टर'

भाजपा शुरू से ही नवाब मलिक और उनके परिवार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को सत्ता के ढांचे में शामिल करने का विरोध करती रही है। कप्तान मलिक के नाम पर भाजपा का कड़ा रुख शिंदे की मुश्किलें और बढ़ा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि एनसीपी अपनी मांग पर अड़ी रहती है, तो महायुति के सीट-शेयरिंग फॉर्मूले में नए सिरे से बदलाव करना पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगली बैठक पर टिकी हैं, जहाँ इस 'डेडलॉक' को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।

Navbharat Live
navbharatlive.com