पति ने दिया साथ तो नगरसेविका की जाएगी कुर्सी! राज्य सरकार का बड़ा एक्शन, जालना मनपा में मचा हड़कंप

Woman Councillor Disqualification: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला। पति ने किया नगरसेविका के काम में दखल, तो जाएगी कुर्सी! 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर भी लग सकता है बैन। जानें क्या हैं नए नियम।
State Govt to disqualify women councillors if husbands or relatives interfere in official work. 6-year election ban possible for violating reservation norms.
जालना महानगरपालिका प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Jalna News: महिला आरक्षण की भावना से खिलवाड़ अब महंगी पड़ने जा रही है। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में अगर पत्नी नगरसेविका होकर सिर्फ नाम की जनप्रतिनिधि बनी रही और असली फैसले पति या रिश्तेदार लेने लगे, तो अब सीधे कार्रवाई होगी। राज्य सरकार ने ऐसे 'पावर बैकडोर' पर लगाम कसते हुए साफ कर दिया है कि कामकाज में हस्तक्षेप हुआ तो नगरसेविका की कुर्सी जाएगी।

इतना ही नहीं, आगे चुनाव लड़ने का रास्ता भी बंद हो सकता है। अक्सर यह देखा गया है कि चुनी गई नगरसेविकाओं के प्रभागों में विकास कार्यों की योजना बनाना, बैठकों में शामिल होना और अधिकारियों से संवाद करना आदि कार्य उनके पति या करीबी रिश्तेदार ही करते हैं। कई जगहों पर 'नगरसेवक पति' जैसी अनौपचारिक पहचान भी बन चुकी है।

उल्लेखनीय है कि महिला आरक्षण का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में सशक्त बनाना है। हकीकत यह है कि परिजनों के हस्तक्षेप के चलते उनका नेतृत्व प्रभावित हो रहा है। सरकार के इस फैसले से महिलाओं को स्वयं प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से लागू नए नियमों के तहत यदि यह साबित होता है कि किसी महिला जनप्रतिनिधि के प्रशासनिक कार्यों में उसके पति या रिश्तेदार की दखल है।

अगला चुनाव लड़ने पर भी लग सकती रोक

समझा जाता है कि केवल पद रद्द करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। हस्तक्षेप के आधार पर पद गंवाने वाली महिला नगरसेविकाओं को अगले छह वर्षों तक चुनाव लड़ने से भी अयोग्य ठहराया जा सकता है। ऐसे में परिजनों की राजनीति के कारण महिला प्रतिनिधियों का पूरा राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम व राज्य सरकार के नगर विकास विभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, चुने गए जनप्रतिनिधि को ही अपने सभी कर्तव्यों का निर्वहन करना अनिवार्य है। किसी भी बैठक में नगरसेविका की जगह उनके पति या रिश्तेदार के बैठने या निर्देश देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

आरक्षण के चलते महिलाओं को मिल रहा अवसर

15 जनवरी को संपन्न हुए मनपा चुनाव में आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में महिलाओं को अवसर मिला है। 65 सदस्यीय मनपा में कुल 33 महिला नगरसेविकाएं निर्वाचित हुई हैं।

अतिरिक्त आयुक्त अर्जुन गिराम ने कहा कि यदि किसी वार्ड के नागरिक या विरोधी उम्मीदवार यह शिकायत करते हैं कि नगरसेविका के कार्यों में उनके पति का हस्तक्षेप हो रहा है और इसके ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जाते हैं, तो विभागीय आयुक्त के माध्यम से इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर सीधे अपात्रता की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

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