गड़चिरोली IED ब्लास्ट केस: 15 जवानों की मौत के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत

Supreme Court ने 2019 गड़चिरोली IED विस्फोट केस में आरोपी कैलाश रामचंदानी को कड़ी शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी। वह 2019 से जेल में बंद था। इस विस्फोट में 15 पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
Supreme Court on Stray Dogs
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Gadchiroli IED Case: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के गड़चिरोली में 2019 में हुए भीषण IED विस्फोट मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने लंबे समय से जेल में बंद आरोपी कैलाश रामचंदानी को सख्त शर्तों के साथ अंतरिम जमानत प्रदान की।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले में वर्ष 2019 में हुए IED विस्फोट मामले में कथित नक्सल समर्थक कैलाश रामचंदानी को अंतरिम जमानत दे दी। इस विस्फोट में 15 पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिससे पूरा देश दहल गया था।

एनआईए के आरोपों के बावजूद राहत

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने रामचंदानी की जमानत का कड़ा विरोध किया। एनआईए ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपी की भूमिका गंभीर है और उसके हाथ पुलिसकर्मियों के खून से सने हैं। इसके बावजूद प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आरोपी को अंतरिम राहत देना उचित समझा।

लंबी न्यायिक हिरासत बनी आधार

पीठ ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि कैलाश रामचंदानी को 29 जून 2019 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह लगातार जेल में बंद है। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक विचाराधीन कैदी को जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब अब तक आरोप तय नहीं हो सके हैं।

जमानत की सख्त शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को कई कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी है। रामचंदानी को अपने पैतृक स्थान गड़चिरोली में ही रहने का निर्देश दिया गया है और वह विशेष एनआईए अदालत की पूर्व अनुमति के बिना जिले से बाहर नहीं जा सकेगा।

उसे केवल मुंबई स्थित विशेष एनआईए अदालत में सुनवाई के लिए गड़चिरोली से बाहर जाने की अनुमति होगी। साथ ही उसे हर सप्ताह स्थानीय पुलिस थाने में हाजिरी लगानी होगी और पुलिस को अपना मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द होगी

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि यह पाया गया कि आरोपी ने नक्सलियों से संपर्क करने की कोशिश की या जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया, तो एनआईए उसकी अंतरिम जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकती है।

पहले हाईकोर्ट से मिल चुकी थी निराशा

रामचंदानी ने 5 मार्च 2024 को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और मुकदमे की सुनवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

Navbharat Live
navbharatlive.com