
Makar Sankranti Market:मकर संक्रांति
Gadchiroli News मकर संक्रांति का पर्व अब केवल दो दिन दूर है। इसे देखते हुए शहर के बाजारों में तिल-गुड़, वाण (बर्तन) और पतंगों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। हालांकि, गत वर्ष की तुलना में इन सामग्रियों के दामों में लगभग 20 फीसदी की वृद्धि होने से त्योहार की मिठास कुछ हद तक फीकी पड़ती नजर आ रही है।
गड़चिरोली के बाजार में जहां गुड़ 60 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है, वहीं तिल की कीमत भी 150 रुपये प्रति किलो से अधिक हो गई है। महंगाई के बावजूद मकर संक्रांति को लेकर महिलाओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है और वे उत्साहपूर्वक खरीदारी करती नजर आ रही हैं।
तिल-गुड़ के साथ-साथ मकर संक्रांति पर वाण (बर्तन) और पतंगों की खरीद भी बढ़ गई है। लेकिन इनके दाम भी इस वर्ष आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। गत वर्ष की तुलना में वाण के दामों में भी करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं पतंगों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं।

तिल से बनी गजक और तिल के लड्डुओं के दाम भी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हो गए हैं, जिससे रेडीमेड तिल उत्पादों की खरीद आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। इसके बावजूद महिलाएं अपनी आवश्यकता के अनुसार खरीदारी करती दिखाई दे रही हैं। गड़चिरोली शहर में 5 से 100 रुपये तक के विभिन्न प्रकार के वाण बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
जानकारों के अनुसार, मकर संक्रांति का पर्व रथ सप्तमी तक मनाया जाता है। इस अवसर पर तिल-गुड़ और खिचड़ी का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति के पूर्व स्नान करते समय पानी में तिल डालने की परंपरा है। वहीं इस दिन सूर्य उपासना कर भगवान को तिल से बनी वस्तुओं का भोग लगाया जाता है।
आगामी 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। त्योहार में अब केवल दो दिन शेष रहने के कारण आवश्यक सामग्री की खरीद के लिए बाजारों में महिलाओं की चहल-पहल बढ़ गई है। वहीं विक्रेताओं का कहना है कि इस पर्व के चलते बाजारों में अच्छी रौनक देखने को मिल रही है।
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आमतौर पर नागपुर के बाजारों से गड़चिरोली में पतंगें लाई जाती हैं। मकर संक्रांति में अब केवल दो दिन शेष रहने के कारण शहर की सभी दुकानों में विभिन्न प्रकार की पतंगें उपलब्ध हो गई हैं। पतंग उड़ाने के लिए विशेष मांजा भी बाजार में आया है, जिसकी खरीदारी बच्चों समेत अन्य लोग कर रहे हैं।
पतंगों की कीमत 50 रुपये से लेकर 500 रुपये तक रखी गई है। राज्य सरकार द्वारा नायलॉन मांजे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसको लेकर नगर परिषद प्रशासन ने विशेष अभियान भी शुरू किया है। हालांकि अब तक किसी दुकान से प्रतिबंधित मांजा जब्त नहीं किया गया है, लेकिन नगर परिषद की टीम लगातार दुकानों पर नजर बनाए हुए है।






